हिंदी शायरी 2 दो लाइन



  • जब भी आता है तेरा मेरे नाम के साथ 
  • जाने क्यूँ लोग मेरे नाम से जल जाते हैं.................$$$$$

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  • परिंदे भी नहीं रहते पराये आशियानों में,

  • हमने जिंदगी गुजारी है किराये के मकानों में....................$$$$$

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  • तबाहियों का अगर किसी ने सबब पुछा,
  • ज़ुबान-ए-हाल ने बे-साख्ता कहा, "आँखें".................$$$$$

  • अब तो आँखों में समाती नहीं सूरत कोई 
  • गौर से मैंने तुझे काश न देखा होता.................$$$$$

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  • क्यूँ तुझे देख कर उठती हैं निगाहें मुझ पर 
  • क्या तेरे चेहरे पे मेरा नाम लिखा होता है.................$$$$$


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  • मुझे तो होश नही, तुमको खबर हो शायद ,

  • लोग कहते है कि तुम ने मुझ को बर्बाद कर दिया .................$$$$$

  • मिलिए जरूर इनसे बड़े मोतबर हैं लोग 
  • करते हैं सर कलम भी बड़े एहतराम से.................$$$$$

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  • है देखने वालों को सम्भलने का इशारा 
  • थोड़ी सी नकाब आज वो सरकाए हुए हैं |

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  • है देखने वालों को सम्भलने का इशारा 
  • थोड़ी सी नकाब आज वो सरकाए हुए हैं.................$$$$$


  • सरकते सरकते हम सरक कर दुनिया से सरक गए
  • मगर उन्हें क्या,वो तो हमे सरकाने भी नहीं आये.................$$$$$

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  • भला आँचल ही क्या कम था रुख-ए-ज़ेबा छुपाने को,
  • के जुल्फों की सियाह दीवार भी लाकर खड़ी कर दी.....................$$$$$


  • जाने किस-किस की मौत आई है
  • आज रुख पे कोई नकाब नहीं.................$$$$$

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  • करके मोहब्बत अपनी खता हो.. ऐसा भी हो सकता है...................$$$$$
  • वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है...................$$$$$

  • अर्ज़-ए-तलब पे उसकी चुप से ज़ाहिर है इंकार मगर...................$$$$$
  • शायद वो कुछ सोच रहा हो.. ऐसा भी हो सकता है...................$$$$$

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  • ग़म बढे़ आते हैं क़ातिल की निगाहों की तरह
  • तुम छिपा लो मुझे, ऐ दोस्त, गुनाहों की तरह.................$$$$$

  • जिनके ख़ातिर कभी इल्ज़ाम उठाये हमने
  • वो भी पेश आये हैं इंसाफ़ के शाहों की तरह.................$$$$$

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  • ज़िन्दगी को भी सिला कहते हैं कहनेवाले
  • जीनेवाले तो गुनाहों की सज़ा कहते हैं.................$$$$$

  • चंद मासूम से पत्तों का लहू है "फ़ाकिर".................$$$$$
  • जिसको महबूब के हाथों की हिना कहते हैं

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  • मुम्किन है के तु जिसको समझता है बहाराँ
  • औरों की निगाहों में वो मौसम हो ख़िज़ाँ का.................$$$$$

  • शायद के ज़मीँ है वो किसी और जहाँ की
  • तू जिसको समझता है फ़लक अपने जहाँ का.................$$$$$

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  • नाख़ुदा को ख़ुदा कहा है तो फिर
  • डूब जाओ, ख़ुदा ख़ुदा न करो.................$$$$$

  • इश्क़ है इश्क़, ये मज़ाक नहीं
  • चंद लम्हों में फ़ैसला न करो.................$$$$$

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  • शायद ये वक़्त हमसे कोई चाल चल गया
  • रिश्ता वफ़ा का और ही रंगो में ढल गया.................$$$$$

  • उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िन्दगी
  • हर शय जहाँ हसीन थी, हम तुम थे अजनबी.................$$$$$

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  • मुहब्बत में वफ़ादारी से बचिये
  • जहाँ तक हो अदाकारी से बचिये.................$$$$$

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  • वो संग-ए-दिल था कोई बेगाना-ए-वफ़ा था
  • करते रहें हैं जिसका हम इंतज़ार बरसों.................$$$$$

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  • जब भी तन्हाई से घबरा के सिमट जाते हैं
  • हम तेरी याद के दामन से लिपट जाते हैं.................$$$$$

  • हम तो आये थे रहें शाख़ में फूलों की तरह
  • तुम अगर ख़ार समझते हो तो हट जाते हैं.................$$$$$

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  • फ़ल्सफ़े इश्क़ में पेश आये सवालों की तरह
  • हम परेशाँ ही रहे अपने ख़यालों की तरह.................$$$$$

  • ज़िक्र जब होगा मुहब्बत में तबाही का कहीं
  • याद हम आयेंगे दुनिया को हवालों की तरह.................$$$$$

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  • जो दिल माँगा तो वो बोले की ठहरो, याद करने दो
  • ज़रा सी चीज़ थी हमने खुदा जाने कहाँ रख दी.................$$$$$

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  • आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंज़र क्यूँ है
  • ज़ख़्म हर सर पे हर इक हाथ में पत्थर क्यूँ है.................$$$$$

  • अपना अंजाम तो मालूम है सब को फिर भी
  • अपनी नज़रों में हर इन्सान सिकंदर क्यूँ है.................$$$$$

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  • कासिम पयाम-ए-शौक़ को इतना ना कर तवील,
  • कहना फ़क़त ये उन से के, आँखे तरस गयी.................$$$$$

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  • आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंज़र क्यूँ है
  • ज़ख़्म हर सर पे हर इक हाथ में पत्थर क्यूँ है.................$$$$$

  • अपना अंजाम तो मालूम है सब को फिर भी
  • अपनी नज़रों में हर इन्सान सिकंदर क्यूँ है .................$$$$$

  • तहज़ीब यह नई है, इसको सलाम कहिए 
  • ‘रावण’ जो सामने हो, उसको भी ‘राम’ कहिए .................$$$$$

  • मौजूद जब नहीं वो ख़ुद को खुदा समझिए 
  • मौजूदगी में उनकी , ख़ुद को ग़ुलाम कहिए.................$$$$$

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  • अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं
  • कुछ शे़र फ़क़त उनको सुनाने के लिए हैं.................$$$$$

  • अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
  • कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं.................$$$$$

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  • बरसों में मरासिम बनते हैं लम्हों में भला क्या टूटेंगे, 
  • तू मुझ से बिछड़ना चाहे तो दीवार उठा धीरे धीरे..................$$$$$

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  • दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं
  • ज़ख़्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं.................$$$$$

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  • बरसों में मरासिम बनते हैं लम्हों में भला क्या टूटेंगे, 
  • तू मुझ से बिछड़ना चाहे तो दीवार उठा धीरे धीरे..................$$$$$

  • नर्म आवाज़ भली बातें मोहज़्ज़ब लहजे
  • पहली बारिश में ही ये रंग उतर जाते हैं.................$$$$$

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  • दिन आ गये सबाब के आँचल संभालिये 
  • होने लगी है शहर में हल-चल संभालिये .................$$$$$

  • चलिये संभल संभल के कठिन राह-ए-इश्क़ है .................$$$$$
  • नाज़ुक बड़ी है आप की पायल संभालिये

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  • उसकी महफ़िल में वही सच था वो जो कुछ भी कहे
  • हम भी गूंगों की तरह हाथ उठा देते थे.................$$$$$
  • हम भी अब झूठ की पेशानी को बोसा देंगे
  • तुम भी सच बोलने वालों को सज़ा देते थे.................$$$$$

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  • दिल नाउमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
  • लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है.................$$$$$

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  • काली रातों को भी रंगीन कहा है मैंने
  • तेरी हर बात पे आमीन कहा है मैंने.................$$$$$
  • तेरी दस्तार पेतन्कीद की हिम्मत तो नहीं
  • अपनी पापोश को कालीन कहा है मैंने.................$$$$$

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  • ये भी क्या एहसान कम हैं देखिये न आप का 
  • हो रहा है हर तरफ़ चर्चा हमारा आप का .................$$$$$

  • चाँद में तो दाग़ है पर आप में वो भी नहीं 
  • चौधवी के चाँद से बड़कर है चेहर आप का.................$$$$$

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  • या तो मिट जाइये या मिटा दीजिये 
  • कीजिये जब भी सौदा खरा कीजिये.................$$$$$

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  • झूठी बुलंदियों का धुँआ पार कर के आ
  • क़द नापना है मेरा तो छत से उतर के आ
  • इस पार मुंतज़िर हैं तेरी खुश-नसीबियाँ.................$$$$$
  • लेकिन ये शर्त है कि नदी पार कर के आ

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  • दाग़ दुनिया ने दिये ज़ख़्म ज़माने से मिले
  • हमको ये तोहफ़े तुम्हें दोस्त बनाने से मिले .................$$$$$

  • ख़ुदसे मिल जाते तो चाहत का भरम रह जाता 
  • क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले.................$$$$$

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  • धोका मुझे दिये पे हुआ आफ़ताब का
  • ज़िक्रे-शराब में भी है नशा शराब का.................$$$$$
  • सूरजमुखी के फूल से शायद पता चले
  • मुँह जाने किसने चूम लिया आफ़ताब का.................$$$$$

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  • लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं
  • इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं.................$$$$$
  • मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा हूँ
  • रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं.................$$$$$

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  • ये अमीरे शहर के दरबार का कानून है
  • जिसने सजदा कर लिया तोहफे में कुर्सी मिल गई.................$$$$$

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  • दाग़ दुनिया ने दिये ज़ख़्म ज़माने से मिले
  • हमको ये तोहफ़े तुम्हें दोस्त बनाने से मिले .................$$$$$

  • ख़ुदसे मिल जाते तो चाहत का भरम रह जाता 
  • क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले .................$$$$$


  • हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो|
  • ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो.................$$$$$
  • न जाने कौन सी मज़बूरीओं का क़ैदी हो,
  • वो साथ छोड़ गया है तो बेवफ़ा न कहो.................$$$$$

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  • तेरे इश्क ने अता की मुझे कायिनाते उल्फत 
  • मुझे सबसे दुश्मनी थी तेरी दोस्ती से पहले.................$$$$$


  • अता-प्रदान 
  • कायिनाते उल्फत -सारे ज़माने की मुहब्बत.................$$$$$

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  • नज़र के सामने कुछ अक्स झिलमिलाये बहुत
  • हम उनसे बिछुड़े तो दिल में ख्याल आये बहुत.................$$$$$

  • थीं उनको डूबते सूरज से निस्बतें कैसी !
  • ढली जो शाम तो कुछ लोग याद आये बहुत.................$$$$$

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  • मेरी बर्बादियों का हमनशीनो
  • तुम्हें क्या, खुद मुझे भी ग़म नहीं है.................$$$$$

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  • सच है हम ही को आप के शिकवे बजा ना थे,
  • बेशक सितम जनाब के सब दोस्ताना थे.................$$$$$

  • हाँ जो जफ़ा भी आप ने की,कायदे से की,
  • हाँ हम ही काराबंद-ए-उसूल-ए-वफ़ा ना थे.................$$$$$

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  • हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है,
  • दुशनाम तो नहीं है ये इकराम ही तो है.................$$$$$

  • दिल मुद्दई के हर्फ़-ए-मलामत से शाद है,
  • ए जान-ए-जां, ये हर्फ़ तेरा नाम ही तो है.................$$$$$

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  • आ के वाबस्ता हैं उस हुस्न की यादें तुझ से
  • जिस ने दिल को परी-खाना बना रखा था..................$$$$$
  • जिसकी उल्फत में भुला रखी थी दुनिया हम ने
  • दहर को दहर का अफ़साना बना रखा था..................$$$$$

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  • तुझ से खेली हैं वो महबूब हवाएं जिन में
  • उसके मलबूस की अफ्सुर्दा महक बाकी है..................$$$$$
  • तुझ पे भी बरसा है उस बाम से महताब का नूर
  • जिस में बीती हुई रातों की कसक बाकी है..................$$$$$

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  • अपने सिवा बाताओ तुम्हे कूछ मिला है फरज.................$$$$$


  • हजार बार ली है तुमने मेरे दिल कि तालाशीयां
  • बहुत उम्दा शेर पेश किये दोस्त........................$$$$$

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  • मत पूछ क्या हाल है मेरा तेरे पीछे,
  • तू देख की क्या रंग है तेरा मेरे आगे.................$$$$$

  • ईमान मुझे रोके है तो खींचे है मुझे कुफ्र,
  • काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे.................$$$$$

  • गो हाथ को जुम्बिश नहीं, आँखों में तो दम है,
  • रहने दो अभी सागर-ओ-मीना मेरे आगे.................$$$$$

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  • तबाहियों का अगर किसी ने सबब पुछा,
  • ज़ुबान-ए-हाल ने बे-साख्ता कहा, "आँखें".................$$$$$

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  • भला आँचल ही क्या कम था रुख-ए-ज़ेबा छुपाने को,
  • के जुल्फों की सियाह दीवार भी लाकर खड़ी कर दी.....................$$$$$

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  • बहुत ही खूबसूरत बात कही है,शायर ने.

  • एक उम्दा शेर के लिए आपको धन्यवाद..................$$$$$

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  • बहुत उम्दा शेर पेश किये दोस्त.......
  • उत्साह वर्धन के लिए धन्यवाद मित्रों.................$$$$$

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  • जिन्दगी एक सुलगती सी चिता है साहिर
  • शोला बनती है न ये बुझ के धुँआ होती है.................$$$$$

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  • इतना न पास आ कि तुझे ढूंढते फिरें
  • इतना न दूर जा कि हमावक्त पास हो.................$$$$$

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  • तुम मुझे रूह में ही बसा लो फ़राज़


  • दिल-ओ-जान के रिश्ते अक्सर टूट जाया करते हैं.....................$$$$$

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  • जिनकी खातिर तोड़ दी सारी सरहदें हमने ,



  • आज उसीने कह दिया जरा हद में रहा करो ....................$$$$$

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  • वो मेरी लाश पे आया रो न सका फ़रज़


  • उस को मेरे सुकून का कितना ख्याल था....................$$$$$

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  • नुक्*तह-चीं है ग़म-ए दिल उस को सुनाए न बने
  • क्*या बने बात जहां बात बनाए न बने.................$$$$$

  • मैं बुलाता तो हूं उस को मगर अय जज़्*बह-ए दिल
  • उस पह बन जाए कुछ ऐसी कि बिन आए न बने.................$$$$$

  • खेल सम्*झा है कहीं छोड़ न दे भूल न जाए
  • काश यूं भी हो कि बिन मेरे सताए न बने.................$$$$$

  • ग़ैर फिर्*ता है लिये यूं तिरे ख़त को कि अगर
  • कोई पूछे कि यह क्*या है तो छुपाए न बने.................$$$$$

  • इस नज़ाकत का बुरा हो वह भले हैं तो क्*या
  • हाथ आवें तो उंहें हाथ लगाए न बने.................$$$$$

  • कह सके कौन कि यह जल्*वह-गरी किस की है
  • पर्*दह छोड़ा है वह उस ने कि उठाए न बने.................$$$$$

  • मौत की राह न देखूं कि बिन आए न रहे
  • तुम को चाहूं कि न आओ तो बुलाए न बने.................$$$$$

  • बोझ वह सर से गिरा है कि उठाए न उठे
  • काम वह आन पड़ा है कि बनाए न बने.................$$$$$

  • `इश्*क़ पर ज़ोर नहीं है यह वह आतिश ग़ालिब
  • कि लगाए न लगे और बुझाए न बने.................$$$$$

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  • मेहरबान हो के बुला लो मुझे चाहो जिस वक्त


  • मैं गया वक्त नहीं हूँ कि फिर आ भी न सकूँ.................$$$$$

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  • जिसको कभी जानाही नहीं हम उसको खुदा क्यों माने ?


  • और जिसे जान चुके है, वो खुदा कैसे हो .................$$$$$

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  • सामने हो तो उसे लोग बुरा कहते हैं
  • जिसे देखा ही नहीं उसको खुदा कहते हैं.................$$$$$

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  • एक बार ही जी भर के सज़ा क्यूँ नहीं देते |
  • मै हर्फ़ -ए -गलत हूँ तो मिटा क्यूँ नहीं देते.................$$$$$
  • मोती हूँ तो दामने मुज्ना में पिरो लो ,
  • आंसूं हूँ तो पलकों से गिरा क्यूँ नहीं देते .................$$$$$
  • साया हूँ तो साथ न रखने की वजह क्या ,
  • पत्थर हूँ तो रास्ते से हटा क्यूँ नहीं देते.................$$$$$

  • ******************************

  • जिनकी खातिर तोड़ दी सारी सरहदें हमने ,
  • आज उसीने कह दिया जरा हद में रहा करो ....................$$$$$

  • ******************************

  • जिसको कभी जानाही नहीं हम उसको खुदा क्यों माने ?


  • और जिसे जान चुके है, वो खुदा कैसे हो.................$$$$$
  • वाह वाह ! वाह वाह !

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  • है मेरी प्यास की शिद्दत पे अगर शक तुझको
  • ला मेरे सामने बहता हुआ दरिया रख दे.................$$$$$

  • एक कोज़े में समा जाएगा दरिया क्यूँकर 
  • किस तरह रख के लिफ़ाफ़े में तमन्ना भेजू .................$$$$$

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  • उसने दिन रात मुझको सताया इतना
  • कि नफरत भी हो गई और मोहब्बत भी हो गई..................$$$$$

  • उसने इस नजाकत से मेरे होठों को चूमा,
  • कि रोज़ा भी न टुटा और अफ्तारी भी हो गई..................$$$$$

  • उसने इस अहतराम से, मुझसे मोहब्बत की,
  • कि गुनाह भी न हुआ और इबादत भी हो गई.

  • मत पूछ उसके प्यार करने का अंदाज़ कैसा था....................$$$$$

  • उसने इस शिद्दत से मुझे, सीने से लगाया,
  • कि मौत भी न हुई और जन्नत भी मिल गई..................$$$$$

  • ******************************

  • उसने दिन रात मुझको सताया इतना
  • कि नफरत भी हो गई और मोहब्बत भी हो गई..................$$$$$

  • उसने इस नजाकत से मेरे होठों को चूमा,
  • कि रोज़ा भी न टुटा और अफ्तारी भी हो गई..................$$$$$

  • उसने इस अहतराम से, मुझसे मोहब्बत की,
  • कि गुनाह भी न हुआ और इबाबत भी हो गई..................$$$$$

  • मत पूछ उसके प्यार करने का अंदाज़ कैसा था....................$$$$$

  • उसने इस शिद्दत से मुझे, सीने से लगाया,
  • कि मौत भी न हुई और जन्नत भी मिल गई..................$$$$$


  • ******************************


  • जिनकी खातिर तोड़ दी सारी सरहदें हमने ,



  • आज उसीने कह दिया जरा हद में रहा करो ....................$$$$$


  • वो मेरी लाश पे आया रो न सका फ़रज़


  • उस को मेरे सुकून का कितना ख्याल था....................$$$$$


  • एक बार फिर से कहना पड़ेगा......................$$$$$

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  • ठीक हूँ विक्की जी,

  • काफी दिनों बाद आये हैं आप फोरम पर..................$$$$$

  • अब आप आये हैं तो कोई नयी कविता या शेर लिखिए,

  • काफी दिनों से आपने कुछ लिखा नहीं.................$$$$$

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  • दुनिया भी उसी की है, दुनिया को जो ठुकरा दे,

  • जितना उसे ठुकराया, उतनी ही क़रीब आयी.................$$$$$

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  • तुम्हारा नाम लेने से मुझे सब जान जाते हैं,

  • मैं वो खोयी हुई इक चीज़ हूँ जिसका पता तुम हो.................$$$$$

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  • मुझे तो होश नही, तुमको खबर हो शायद ,

  • लोग कहते है कि तुम ने मुझ को बर्बाद कर दिया.................$$$$$

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  • बर्बादी की देहलीज पर बैठ कर अपने साये से भी डरते हैं
  • वो हस कर विदा हुई और हम आज भी अपनी किस्मत को रोते हैं.................$$$$$

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  • बंधू आपके प्रेम भरे पोस्ट के खातिर एक शेर अर्ज किया है.....................$$$$$
  • जरा पढ़ लीजिये...इससे पहली पोस्ट पर...................$$$$$

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  • भला आँचल ही क्या कम था रुख-ए-ज़ेबा छुपाने को,

  • के जुल्फों की सियाह दीवार भी लाकर खड़ी कर दी.....................$$$$$

  • हजारों इब्ने आदम खुल्द में दिल अपना खो देते 
  • बहुत अच्छा किया जो सर पे आंचल रख लिया तुमने .................$$$$$

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  • तुम्हारा नाम लेने से मुझे सब जान जाते हैं,

  • मैं वो खोयी हुई इक चीज़ हूँ जिसका पता तुम हो.................$$$$$

  • क़तील शिफ़ाई

  • क्यूँ तुझे देख कर उठती हैं निगाहें मुझ पर 
  • क्या तेरे चेहरे पे मेरा नाम लिखा होता है.................$$$$$

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