ग़ज़ल and नज़्म


  • चाहत यही
  • कि गुज़रे एक शाम
  • तुम्हारे साथ
  • करूँ महसूस
  • ज़मीं से ऊपर उड़ रहे कदमों को
  • हवा से लहराता हुआ बदन
  • कानों में गूँजता मल्हार.
  • चाहत ये भी कि
  • ठण्ड से सख्त हुए गालों पर
  • गर्म सेंक तुम्हारे हाथों  की
  • और झुकी बंद पलकों पर
  • अनगिनत बोसे लबों के .
  • चाहत ज़रा सी
  • शामें अनगिनत
  • ढल जाएगी ज़िंदगी
  • ऐसी ही शाम में
  • कि चाहत फिर भी
  • रहेगी ज़िन्दा
  • गुज़रे एक शाम तुम्हारे साथ .........$$$$$

  • *********************************
  •  
  • माँ !!!
  • माँ तुम्हारी नम आँखें
  • बहा देती हैं
  • पूरा जहाँ मेरा
  • तुम्हारी इक मुस्कान
  • उड़ने को दे देती है
  • मुझे पूरा जहाँ
  • तुम्हारे चेहरे की शिकन
  • और  मंथन
  • घनघोर अँधेरे में भी 
  • चीर देती  है मुझे
  • नज़र आता है फिर 
  • उसी में
  • जीवन दर्पण
  • खोजती हूँ खुद को
  • तेरी साँसों में
  • जानती हूँ जबकि
  • तेरी रूह हूँ मैं
  • माँ… तुम हो तो हूँ मै ….
  • तुम हो तो ही मै …!!!

  • *********************************
  •   
  • सुर्ख औरत !
  • गर्म तंदूर या सुर्ख अंगारों पर
  • बनाए जाते हैं
  • स्वादिष्ट टिक्के
  • औरत की खूबसूरती का
  • राज़ भी यही
  • सेंकती है खुद को हर दिन
  • तपती है जलती है
  • और हो जाती है सुर्ख
  • अपनी तपिश में खुद को पकाकर
  • करती है पेश
  • समाज को
  • एक सभ्य सम्पूर्ण औरत
  • कि सभी को पसंद आती है
  • ख़ामोश…. सुर्ख….. दमकती औरत !

  • *********************************
  •  
  • चाँद टूटा और बिखरा …
  • चाँद टूटा और बिखरा किसने ये जाना यहाँ
  • हाँ बिखरती चाँदनी को सबने पहचाना यहाँ .

  • सूरज के उगते ही जहाँ में फैल गई रौशनी
  • तम को अस्तित्वहीन फिर सबने माना यहाँ .

  • दिल की ज़मीं नम है बहुत रोपने को बीज
  • लहलहाते लबों से ही मौसम सुहाना यहाँ .

  • वो समंदर क्या करे जो चाहे साहिल को बहुत
  • लहरों को सुनाता है वो दिल का फ़साना यहाँ.

  • हर राग है अलग यहाँ धुन  भी अलग हुई
  • सुनेगा कौन इंदु अब  किसका  तराना यहाँ

  • *********************************
  •   
  • उदास मन …
  • उदास मन 
  • उदास शामें
  • नापसंद हैं तो क्या
  • जो लिखी आपके हिस्से
  • वो मिलेंगी ज़रूर 
  • जब भी गुज़रे
  • ऐसी शाम करीब से
  • न छूना 
  • बस देखना ध्यान से
  • लिपटे हुए जीवन को 
  • कुछ कसा कुछ दबा 
  • बेचैन सा होगा व्याकुल
  • आने को बाहर
  • ज़रूरत 
  • बस इतनी कि
  • फैला दो विस्तार मन का
  • मुस्कुरा दो 
  • एक मुस्कान कर देगी उसे
  • सारे बंधनों से मुक्त
  • उदास शाम उसी पल
  • मुस्कुराता जीवन बन जाएगी .

  • *********************************
  •  
  • फ़लक पे चाँद
  • फ़लक पे लटका चाँद
  • चिढ़ाता नहीं
  • बल्कि लटका है वो
  • कई – कई फंदों में
  • झूल रहा है
  • पूर्णिमा से अमावास
  • इसलिए नहीं
  • कि उसे पसंद है
  • बल्कि हवा का दबाव
  • ही बहुत कम है
  • इतना कम
  • कि लटकते फंदों में भी
  • नहीं निकल रहा
  • उसका दम
  • जबकि चाहता है
  • वो मुक्ति
  • इस घुटन से
  • कि फ़लक पे लटकता
  • चाँद गुज़रता है
  • हर नज़र से …

  • *********************************
  •  
  • शहर में सुना है फिर दंगा हुआ है…

  •  
  • ईमान फिर किसी का नंगा हुआ है.

  • शहर में सुना है फिर दंगा हुआ है..

  • वो एक पत्थर, पहला जिसने चलाया है.

  • ईमान बस उसी का ही नंगा हुआ है..

  • शहर में सुना है फिर दंगा हुआ है..

  • फिर से गलियां देखो खूनी हुई हैं.

  • गोद कितने मांओं की सूनी हुई हैं..

  • उस इन्सान का, क्या कोई बच्चा नहीं है?

  • वो इन्सान क्या, किसी का बच्चा नहीं है??

  • हाँ, वो किसी हव्वा का ही जाया है.

  • वो एक पत्थर, पहला जिसने चलाया है.

  • ईमान बस उसी का ही नंगा हुआ है.. शहर में सुना है फिर दंगा हुआ है…

  • लोथड़े मांस के लटक रहे हैं.

  • खून किसी खिडकी से टपक रहे हैं..

  • आग किसी की रोज़ी को लग गयी है.

  • कोई बिन माँ की रोजी सिसक रही है..

  • हर एक कोने आप में ठिठक गये हैं.

  • बच्चे भी अपनी माँओं से चिपक गये हैं..

  • इन्सानियत का खून देखो हो रहा है.

  • ऊपर बैठा वो भी कितना रो रहा है..

  • दूर से कोई चीखता सा आ रहा है.

  • खूनी है, या जान अपनी बचा रहा है..

  • और फिर सन्नाटा सा पसर गया है.

  • जो चीख रहा था, क्या वो भी मर गया है??

  • ये सारा आलम उस शख्स का बनाया है.

  • वो एक पत्थर, पहला जिसने चलाया है.

  • ईमान बस उसी का ही नंगा हुआ है.. शहर में सुना है फिर दंगा हुआ है…

  • वक्त पर पोलीस क्यों नहीं आई?

  • क्योंकी, ये कोई ऑपरेशन मजनूं नहीं था..

  • नेताओं ने भी होंठ अपने बन्द रक्खे.

  • क्योंकि, खून से हाथ उनके भी थे रंगे..

  • सरकार भी चादर को ताने सो रही थी.

  • उनको क्या, ग़र कोई बेवा हो रही थी..

  • पंड़ित औ मौलवी भी थे चुपचाप बैठे.

  • आप ही आप में दोनों थे ऐंठे..

  • हमने भी, अपना आपा खो दिया था.

  • जो हो रहा था, हमने वो खुद को दिया था..

  • दोषी हम सभी हैं, जो दंगे हुए हैं.

  • ईमान हम सभी के ही, नंगे हुए हैं..

  • खून से हाथ हमसभी के ही, रंगे हुए हैं…

  • पर दंगे का वो सबसे बड़ा सरमाया है.

  • वो एक पत्थर, पहला जिसने चलाया है.

  • ईमान बस उसी का ही नंगा हुआ है.. शहर में सुना है फिर दंगा हुआ है…

  • चंद सिक्कों की हवस, और कुछ नहीं था.

  • हिन्दू ना मुसलमां, कोई कुछ नहीं था..

  • हिन्दू नहीं, जो इन्सान को इन्सां ना समझे.

  • मुसलमां नहीं, जो इन्सानियत को ईमां ना समझे..

  • आपस में लड़ाये धर्म है हैवानियत का.

  • प्यार ही इक धर्म है इन्सानियत का..

  • हम कब तलक ऐसे ही सोते रहेंगे?

  • भड़कावे में गैरों के, अपनों को खोते रहेंगे??

  • बेशर्मों से तब तलक हम नंगे होते रहेंगे?

  • बहकावे में जब तलक दंगे होते रहेंगे!! बहकावे में जब तलक दंगे होते रहेंगे!!!

  • *********************************
  •  

  • कितने बच्चे सोते हैं रोज़ रखकर पेट में लातें अपनी

  •  
  • कितने बच्चे सोते हैं रोज़ रखकर पेट में लातें अपनी
  • बना नहीं अभी कच्चा है कह देती है रोकर जननी ।
  • भोर हुए उठते हैं जब पाते हैं दो ही सिकी रोटी
  • रोटी दो , बच्चे हैं छ: , भूख से बच्ची छोटी रोती,
  • कंठ डुबोकर आंसुओं में थककर बच्चे सो जाते हैं ।
  • सपनों में भी देखकर रोटी रोटी-रोटी चिल्लाते हैं ॥

  • एक तरफ है पैसों की कमी , एक तरफ खूब बर्बादी है
  • एक भाई हँसे रोये दूजा रोये भला ये कैसी आज़ादी है ।
  • अपनी जिद की खातिर कुछ लोग नित पानी सा धन बहाते हैं
  • तनिक-तनिक सी बात-बात पर देखो उत्सव मनाते हैं ।
  • नहीं कुछ परवाह औरों की इनको तो जश्न मनाना है ।
  • जो भरे हुए मस्त बादल हैं उनको ही नीर पिलाना है ॥

  • तुम चाहते हो उत्सव करना तो रोतों को हँसियाँ बाँटो
  • जो पानी पीकर जीते हैं तुम उनको रोटी बाँटो ।
  • हम अलग -अलग चलेंगे तो दुनिया हमको खा जायेगी
  • मिटटी के मोल बिक जायेंगे , दासता फ़िर से छा जायेगी

  • मिलकर सबको निज देश का फ़िर भाग्य बनाना होगा
  • जो घिरे हुए हैं अन्धेरे में उन्हें दीप दिखाना होगा ।
  • मानवता के मूल्यों का यही सही मूल्य कहलायेगा
  • जब ज्ञान – दीप से मानव अज्ञान का तिमिर मिटाएगा ।
  • भूख, गरीबी, लाचारी के सब शब्द इससे मिट जायेंगे
  • भोजन होगा हर प्राणी को हर मुख कमल सा मुस्कुराएगा ।

  • *********************************
  •  
  • गाँव की लड़की
  • याद आ गई खाते हुए कैथा 
  • लाल मिर्च वाले नमक के साथ
  • और सुनाई दी उसकी
  • तेज़ मिर्च वाली
  • चटकारे की चटाक  !
  • फिर फीते से बंधी
  • तेल लगी कसी हुई
  • दो चोटियाँ
  • बीच में सीधी सपाट
  • उसकी माँग
  • जैसे बंटे  हो दो हिस्से
  • और एक भी बाल को
  • इजाज़त नहीं पार करने की
  • वो बाड़ !
  • बैठी दो सहेलियों के साथ
  • चटाचट खेलती गुट्टों की आवाज़
  • चट -चट …….ख़ट-खट
  • खिलखिलाती उन्मुक्त हँसी
  • वो खनकती आवाज़ !
  • नीला कुर्ता सफ़ेद सलवार
  • कुर्ते में चिमटी से लगाया हुआ दुपट्टा
  • जाती हुई स्कूल अपने
  • छोटे भाई-बहनों के साथ
  • जैसे जाना है किसी और ही जहान
  • बस उड़ान को
  • तैयार हो रहे पंख !
  • चूल्हे में कंडे सुलगाती
  • फुंकनी से फूंक मारती
  • चिमटे से लकड़ी सुधारती
  • धुँए से आँखों को मचलती
  • और फिर जलते चूल्हे पर
  • रखती हुई अदहन चावल का 
  • काटती हुई साग
  • एक साथ
  • सारा काम कर लेने का
  • विश्वास !
  • मोटा लगा आल्ता
  • चौड़ी सी पाजेब और
  • तीन -तीन बिछुए
  • लाल साड़ी सपाट माँग में
  • आखिर तक भरा सिन्दूर
  • माथे पे बड़ी सी बिंदी
  • कलाइयों में भरी चूड़ियाँ
  • ओढ़े हुए पिछौरी
  • लम्बा सा घूँघट
  • थोड़ी हील की चप्पल
  • एक नया ही रूप !
  •  फिर सुखाती हुई कथरी
  • गोद में बच्चा
  • चढ़ा चूल्हा, चौका-बासन
  • बिखरे बाल
  • अधखुला शरीर
  • घुटने तक चढ़ी बिना फ़ॉल की साड़ी
  • बटोर रही हैं आँगन
  • आँचर में अभी भी बंधा है कैथा
  • कि खाएगी फुरसत में कभी
  • हाँ वही गाँव की लड़की !

  • *********************************
  •  

  • बुरे कर्मों का देखो मैंने कितना दुःख उठाया है

  •  
  • बुरे कर्मों का देखो मैंने कितना दुःख उठाया है
  • मेरा साया मुझको ही अपनाने से कतराता है

  • जिसको मारी ठोकर आज उसी के दर पे जाता हूँ
  • रो-रोकर अपने दिल का औरों से हाल छुपाता हूँ
  • कोई किसी का नहीं यहाँ कहकर जी बहलाता हूँ
  • आदमी देखो, कैसे यहाँ खुद की चिता जलाता है
  • मेरा साया मुझको ही अपनाने से कतराता है

  • जिसने चाहा दिल से मुझको उसी का अवसान किया
  • उस डाली को काटा मैंने जिसने धूप-छाँव दिया
  • इक छोटी-सी भूल ने मेरे दिल में ऐसा घाव किया
  • अंत समय आया तो अब अंतर्मन पछताता है
  • मेरा साया मुझको ही अपनाने से कतराता है

  • सबको समझा याचक और खुद को समझा दानी
  • यही भूल बन गयी मेरे जीवन की करूण-कहानी
  • हाय, अनजाने में न जाने कितनों की हुई है हानि
  • सोचा तो ये जाना सबको नाच वही नचाता है
  • मेरा साया मुझको ही अपनाने से कतराता है

  • *********************************
  •  
  • आहिस्ता – आहिस्ता !
  • जैसे ही सिल के दाँत
  • घिसने लगते हैं
  • उसे फिर से छिदवाती है औरत
  • पत्थर पर चलती हुई
  • छेनी और हथौड़ी की मार
  • थोड़ा खुरच देती है सिल को
  • और बार – बार लगातार
  • प्रहार के बाद
  • तैयार होती है सिल
  • पूरी तरह
  • अब जो चाहे पीसो
  • पिसेगा
  • पहले थोड़ी खिसकन
  • ज़रूर निकलेगी
  • आहिस्ता – आहिस्ता
  • सब गायब !
  • तैयार की जाती  है औरत
  • भी इसी तरह
  • रोज छेदी जाती है
  • उसके सब्र की सिल
  • हथौड़ी से चोट होती है
  • उसके विश्वास पर
  • और छेनी
  • करती है तार – तार
  • उसके
  • आत्म सम्मान को
  • कि तब तैयार होती है
  • औरत पूरी तरह
  • चाहे जैसे रखो
  • रहेगी
  • पहले थोड़ा विरोध थोड़ा दर्द
  • ज़रूर निकलेगा
  • धीरे 
  • उठाया!

  • *********************************
  •  
  • चली है बेचैन हवा

  •  
  • चली है बेचैन हवा
  • ऐ खुदा ! रोक ले
  • रहम कर ऐ खुदा !
  • ये हवा रोक ले

  • उजड़ गयीं बस्तियाँ
  • मिट गयीं हस्तियाँ
  • बुझ गयीं तूफ़ान में
  • टिमटिमाती बत्तियाँ
  • डूब गयीं कगार पे
  • न जाने कितनी कश्तियाँ
  • ये अन्धकार बढ़ रहा
  • ऐ खुदा ! रोक ले
  • रहम कर ऐ खुदा !
  • ये हवा रोक ले

  • खुद अपनी सृष्टि में
  • क्यों कहर मचा रहा
  • दृश्य क्यों विनाश का
  • हमें तू दिखा रहा
  • ख्याल मेरे मन में ये
  • बार-बार आ रहा
  • क्यों सितम ढा रहा
  • ऐ खुदा ! रोक ले
  • रहम कर ऐ खुदा !
  • ये हवा रोक ले


  • नहीं रुकता प्रेम
  • नहीं रुकता प्रेम
  • कभी भी
  • नहीं …
  • कभी थमता भी नहीं
  • कि बिना संवाद के भी
  • जारी है
  • निरंतर संवाद !

  • मौन की भाषा
  • पढ़ती हैं आँखें
  • मौन के संवाद
  • बोलती हैं आँखें
  • और सुनता है ह्रदय
  • मौन की गूँज को
  • कि नहीं रुकता प्रेम
  • कभी भी
  • नहीं…
  • कभी थमता भी नहीं ….!

  • *********************************
  •  
  • एक नया सा जहाँ बसायेंगे…

  •  
  • एक नया सा जहाँ बसायेंगे.
  • शामियाने नये सजायेंगे..
  • जहाँ खुशियों की बारिशें होंगी.
  • गम की ना कोई भी जगह होगी..
  • रात होगी तो बस सुकूं के लिये.
  • खिलखिलाती हुई सुबह होगी..
  • कोई किसी से ना नफरत करेगा.
  • करेगा प्यार, मोहब्बत करेगा..
  • जहाँ बच्चे ना भूखे सोयेंगे.
  • अपना बचपन कभी ना खोयेंगे..
  • देश का होगा, विकास जहाँ.
  • नेता होंगे सुभाष जैसे जहाँ..
  • जुल्म की दस्तां नहीं होगी.
  • अश्क से आँख ना पुरनम होगी..
  • राम-रहीम में, होगा ना कोई फर्क यहाँ.
  • ऐ खुदा तू भी, रह सकेगा जहाँ – २..
  • ना बना पाये, इस धरती को हम, स्वर्ग तो क्या.
  • इन्सां के रहने के, काबिल तो बना सकते हैं…
  • इन्सां के रहने के, काबिल तो बना सकते हैं…

  • *********************************
  •  
  • हर ख़ुशी में कोई कमी सी है

  •  
  • हर ख़ुशी में कोई कमी-सी है
  • हँसती आँखों में भी नमी-सी है

  • दिन भी चुप चाप सर झुकाये था
  • रात की नब्ज़ भी थमी-सी है

  • किसको समझायें किसकी बात नहीं
  • ज़हन और दिल में फिर ठनी-सी है

  • ख़्वाब था या ग़ुबार था कोई
  • गर्द इन पलकों पे जमी-सी है

  • कह गए हम ये किससे दिल की बात
  • शहर में एक सनसनी-सी है

  • हसरतें राख हो गईं लेकिन
  • आग अब भी कहीं दबी-सी है


  • दरिया (हास्य-व्यंग)
  • आज दोपहर बैठे थे हम
  • ऑफिस में अपने
  • ठंडी हवा के बीच
  • मगन थे सपने
  • तभी नज़र गई सामने
  • देखा कि दरिया है कोई
  • हम भी परेशान हो
  • लगे सोचने-भई ये क्या
  • कल तक तो यह था एक कमरा
  • जो आज बन गया है समंदर
  • मन में बड़ा कुतूहल भरा मैंने भी
  • बेचैनी से पूछा
  • अपनी साथी मित्र से-
  • कल तक न था यहाँ दरिया कोई
  • (तब पता चला ये
  • दरिया ही कमरा है)
  • छत से गर्मी की तेजी
  • बरदाश्त नहीं हो रही
  • तभी वो धीरे-धीरे पानी
  • नीचे दे रही
  • जिससे मिले ऑफिस को ठण्डक
  • सभी कर्मचारी हो जाएं तर।
  • तुम भी करो काम आराम से
  • न बेचैन हो इस धार से
  • यदि धार की गति बढ़ी
  • मालिक खुद ही टैंकर बुलाएंगे
  • या फिर उसमे-
  • रेगिस्तान को सुखाएंगे
  • पानी निकल जाएगा
  • तुम्हे कमरा नज़र आएगा
  • फिर न कहना कि
  • गर्मी से बेहतर वो दरिया था
  • जो गन्दा ही सही पर
  • पानी से भरा था…

  • *********************************
  •  

  • मैनें दिल से कहा

  •  
  • मैनें दिल से कहा
  • ऐ दीवाने बता
  • जब से कोई मिला
  • तू है खोया हुआ
  • ये कहानी है क्या
  • है ये क्या सिलसिला
  • ऐ दीवाने बता

  • मैनें दिल से कहा
  • ऐ दीवाने बता
  • धड़कनों में छुपी
  • कैसी आवाज़ है
  • कैसा ये गीत है
  • कैसा ये साज़ है
  • कैसी ये बात है
  • कैसा ये राज़ है
  • ऐ दीवाने बता

  • मेरे दिल ने कहा
  • जब से कोई मिला
  • चाँद तारे फ़िज़ा
  • फूल भौंरे हवा
  • ये हसीं वादियाँ
  • नीला ये आसमाँ
  • सब है जैसे नया
  • मेरे दिल ने कहा


  • वस्ल का सवेरा
  • पूछती रहती हो हर रोज़ 
  • तुम मुझसे सदा 
  • कब ऐसा होगा 
  • कब वैसा होगा 
  • बाद वसलत के जब 
  • हिज्र का न कोई फेरा होगा ।

  • मिलते हो तुम 
  • एक-दो पल किये 
  • उतर जाते हैं दिन के सारे क़र्ज़ 
  • आलम ऐसा है 
  • मुख़्तसर वस्ल का 
  • बाद शब -ए -बारात के 
  • वस्लत का वो कैसा सवेरा होगा ।

  • अपनी क़श्ती लिए 
  • हम जायेंगे कहाँ 
  • शहद और चाँदनी में 
  • भीगेंगे हम कहाँ 
  • बरसों तकती रही मैं जिसको सदा 
  • कब सचमुच वो चाँद मेरा होगा ।

  • आशियाँ सपनों का 
  • कैसा होगा अपना 
  • क्या कलकल बहेगी नदियाँ वहाँ 
  • कैसा होगा मेरा वो नशेमन 
  • सब्ज़ चादर बिछी होगी दूर तक 
  • दराज़ तक न कोई आबादी का घेरा होगा ।

  • तुम बताओ मुझे 
  • कब ऐसा होगा 
  • रंग जायेंगे जब 
  • घर दोनों एक रंग में 
  • और अपनों के बीच 
  • जब न लफ्ज़ कोई तेरा-मेरा होगा ।

  • मैं कहता हूँ तुमसे 
  • ऐ प्रिये ! सुनो 
  • वक़्त-ए-हिज्रां में तुम 
  • गिन-गिन ख्वाब चुनो 
  • वस्ल का एक दिन अपने सवेरा होगा 
  • सपनें सारे तेरे पूरे हो जायेंगे 
  • मिलेगी तुम्हें पुरनूर चाँदनी 
  • और मुस्काता हुआ ये चाँद तेरा होगा ।


  • हर रोज़ एक नया चाँद तुम्हारे लिए
  •  
  •  
  • चाँद क्यूँ आ जाता है
  • मेरे तुम्हारे बीच
  • बैठते हैं हम जब भी बाहम
  • गुफ़्तगू करने कुछ ?
  • जी में आता है
  • धकेलकर पैरों से
  • उछाल दूँ उसे
  • दूर उफ़ुक़ पर
  • या फिर फ़ेंक दूं उठाकर
  • किसी गुलेल से |

  • ग़लती मेरी ही है
  • मैंने ही लायी थी
  • वो तस्वीर
  • चाँद वाली
  • और एक गुब्बारा भी लाया था
  • चाँद वाला
  • बड़े खुश हुए थे तुम
  • बातों ही बातों में
  • वादा कर दिया था मैंने
  • वो भी लाके दूंगा
  • जो चमकता है आसमाँ की गोद में |

  • माँगा था मैंने तब रात से
  • बस एक दिन के लिए
  • चाँद को
  • उधार में
  • हंस करके उसने कहा था
  • वो चाँदनी हंसी
  • अब भी याद है मुझे
  • कहा था उसने कैसे चिढाते हुए
  • ले जा सको तो ले जाओ
  • यहीं तो रखा है
  • इस ताक़ पे यहाँ |

  • बड़ी कशमकश हुई थी
  • तब चाँद के साथ
  • बस उठा ही लिया था उसे
  • पीठ पे मैंने अपने
  • के फुर्र करके जा बैठा था
  • वो फिर उसी ताक़ पे |

  • बहुत कोशिश की थी मैंने
  • तब हर शब
  • उतारने की उसको
  • मैं ज़ीना -ज़ीना चढ़ता था
  • वो ताक़ -ताक़ ऊपर उठता जाता था
  • थककर आखिर मैं एक दिन
  • तडके सुबह घर लौट आया था |

  • बड़ा एहसान -फ़रामोश है वो
  • कुछ ही दिन गए होंगें
  • फेंककर कर के एक फँदा
  • बचाया था डूबने से उसे
  • वादा किया था उसने
  • कम -स -कम एक दिन
  • आयेगा वो तुमसे मिलने
  • मेरे लिए |

  • छोडो ! जाने भी दो !
  • ना आया वो तो क्या हुआ ?
  • मैं दूँगा तुम्हे
  • रंगके इस कैनवास पे
  • हर रोज़
  • एक बेदाग़ नया चाँद
  • तुम्हारे लिए |

  • *********************************
  •  

No comments:

Post a Comment