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मैं जिस्म ओ जान के खेल में बे-बाक हो गया;
किस ने ये छू दिया है कि मैं चाक हो गया....!!!
किस ने कहा वजूद मेरा खाक हो गया;
मेरा लहू तो आप की पोशाक हो गया....!!!



पलकों में आँसू और दिल में दर्द सोया है;
हँसने वालों को क्या पता रोने वाला किस कदर रोया है...!!!
ये तो बस वो ही जान सकता है, मेरी तन्हाई का आलम;
जिसने ज़िंदगी में, किसी को पाने से पहले खोया हो....!!!



सारी उम्र आँखों में एक सपना याद रहा;
सदियाँ बीत गयी पर वो लम्हा याद रहा...!!!
ना जाने क्या बात थी उनमे और हम में;
सारी महफ़िल भूल गए बस वो चेहरा याद रहा...!!!



हर बात का कोई जवाब नही होता,
हर इश्क का नाम खराब नही होता...!!!
यूँ तो झूम लेते हैं नशे में पीने वाले,
मगर हर नशे का नाम शराब नही होता...!!!



सफर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो,
नजर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो...!!!
हजारों फूल देखे हैं इस गुलशन में मगर,
खुशबू वहीं तक है जहाँ तक तुम हो...!!!



आँखों में आंसुओं की लकीर बन गयी;
जैसी चाहिए थी वैसी तकदीर बन गयी...!!!
हमने तो सिर्फ रेत में उंगलियाँ घुमाई थी;
गौर से देखा तो आपकी तस्वीर बन गयी...!!

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