मोहब्बत शायरी २ लाइन में


  • आधी से जियादा शबे-गम काट चुके हैं,
  • अब भी आ जाओ तो यह रात बड़ी है............$$$$$

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  • आने दो इल्तिफात में कुछ और भी कमी,
  • मानूस हो रहे हैं तुम्हारी जफा से हम............$$$$$

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  • आने में सदा देर लगाते ही रहे तुम,
  • जाते रहे हम जान से आते ही रहे तुम............$$$$$

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  • आप पछताएं नहीं जौर से तौबा न करें,
  • आप के सर की कसम 'दाग' का हाल अच्छा है............$$$$$


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  • आप हो, मय हो, खल्वत हो,
  • दिन ये किसको नसीब होते हैं............$$$$$

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  • आप की खातिर से हम करते है जब्ते-इज्तिराब,
  • देखकर बेताब मुझको और घबराते हैं आप............$$$$$

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  • आप के पास जमाना नहीं रहने  देगा,
  • आप से दूर मुहब्बत  नहीं रहने देंगी............$$$$$
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  • आप जिस वक्त दिल में होते हैं,
  • दिल की दुनिया जमील होती है............$$$$$

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  • आम है यूँ तो मेरी बर्बादियों का वाकेआ,
  • वह तो कह दें कि कोई मर मिटा मेरे लिये............$$$$$

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  • आया ही था खयाल कि आंखें छलक पड़ीं,
  • आंसू किसी की याद के कितने करीब हैं............$$$$$

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  • आये तो यूँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबाँ,
  • भूले तो यूँ कि जैसे कभी आश्ना न थे............$$$$$

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  • आये हो कल और आज ही कहते हो कि जाऊं,
  • माना कि हमेशा नहीं अच्छा, कोई दिन और............$$$$$
  • जाते हुए कहते हो कयामत को मिलेंगे,
  • क्या खूब कयामत का है गोया कोई दिन और............$$$$$

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  • आलम न मुझसे पुछिए मेरे खयाल का,
  • आइना बन गया हूँ किसी के जमाल का............$$$$$

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  • आशिकी से मिलेगा ऐ जाहिद,
  • बंदगी से खुदा नहीं मिलता............$$$$$

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  • आशिकों में और उसका नाम रौशन हो गया,
  • शम्अ ने सोचा था मिट जायेगा परवाने का नाम............$$$$$

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  • आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक,
  • कौन जीता है तेरी जुल्फ के सर होने तक............$$$$$
  • आशिकी सब्र - तलब और तमन्ना बेताब,
  • दिल का क्या रंग करूँ, खूने-जिगर होने तक............$$$$$
  • हमने माना कि तगाफुल न करोगे लेकिन
  • खाक हो जायेंगे हम तुमको खबर होने तक
  • गमे-हस्ती का 'असद' किससे जुज-मर्ग इलाज,
  • शम्अ हर रंग में जलती है, सहर होने तक............$$$$$


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  • इक फूल है अंदेशा नहीं जिसको खिजाँ का,
  • वह जख्म जिसे आप ने दामन से हवा दी............$$$$$

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  • इक बार दिखाकर चले जाओ झलक अपनी,
  • हम जल्वा-ए-पैहम के तलबगार कहाँ है............$$$$$

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  • इतनी भी अच्छी नहीं बेकरारी,
  • अब आप से उन्स कम करेंगे............$$$$$


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  • इन बेनियाजियों पै दिल है रहीने- शौक,
  • क्या जाने इसको क्या हो, जो परवा करे कोई............$$$$$

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  • इन्तिहा-ए-करम वह है कि जहाँ,
  • बेगुनाही गुनाह बन जाये............$$$$$

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  • इब्तिदा में हर मुसीबत पर लरज जाता था दिल,
  • अब कोई गम इम्तिहाने-इश्क के काबिल नहीं............$$$$$
  • मुझको वो लज्जत मिली एहसास मुश्किल हो गया,
  • रहते-रहते दिल में, तेरा दर्द भी दिल हो गया............$$$$$

  • इब्तिदा वो थी कि था जीना मुहब्बत में मुहाल,
  • इन्तिहा ये है कि अब मरना भी मुश्किल हो गया............$$$$$

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  • इब्तिदा-ए-इश्क है रोता है क्या,
  • आगे-आगे देखिए होता है क्या............$$$$$

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  • इलाही उनके हिस्से का भी गम मुझको अता कर दे,
  • कि उन मासूम  आंखों  में  नमी  देखी  नहीं जाती............$$$$$
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  • इशरते-कतरा है दरिया में फना हो जाना,
  • दर्द का हद  से गुजरना है  दवा हो  जाना............$$$$$

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  • इश्क  का  जौके-नजारा मुफ्त को बदनाम है,
  • हुस्न खुद बेताब  है  जलवा दिखाने के लिए............$$$$$

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  • इश्क  की  बर्बादियों को  रायगां समझा  था  मैं,
  • बस्तियाँ निकली, जिन्हे वीरानियाँ  समझा  था मैं............$$$$$

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  • इश्क क्या चीज है यह पूछिये परवाने से,
  • जिन्दगी जिसको मयस्सर हुई मर जाने के बाद............$$$$$

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  • इश्क दीवानगी सही लेकिन,
  • अक्ल पर मेरा एतिकाद नहीं............$$$$$

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  • इश्क मुझको नहीं वहशत ही सही,
  • मेरी वहशत तेरी शोहरत ही सही,
  • कत्अ कीजे  न तअल्लुक हमसे,
  • कुछ नहीं है तो अदावत ही सही............$$$$$
  • हम भी दुश्मन तो नहीं हैं अपने
  • गैर से  तुमको मुहब्बत ही सही,
  • अपनी हस्ती ही से हो जो कुछ हो 
  • , आगही गर नहीं,गफलत ही सही,
  • हम भी तस्लीम की खू डालेंगे,
  • बेनियाजी तेरी आदत ही सही।............$$$$$

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  • इश्क में ख्वाब का ख्याल किसे,
  • न लगी आंख जब से आंख लगी............$$$$$

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  • इशरते-कतरा है दरिया में फना हो जाना,
  • दर्द का हद से गुजरना है दवा हो जाना............$$$$$

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  • इश्क का जौके-नजारा मुफ्त को बदनाम है,
  • हुस्न खुद बेताब है जलवा दिखाने के लिए............$$$$$

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  • इश्क की बर्बादियों को रायगां समझा था मैं,
  • बस्तियाँ निकली, जिन्हे वीरानियाँ समझा था मैं............$$$$$

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  • इश्क के रूतबे के आगे आसमाँ भी पस्त है,
  • सर झुकाया है फरिस्तों ने बशर के सामने............$$$$$

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  • इश्क खुद खानुमा-खराब सही,
  • मगर जिन्दगी की पनाह है प्यारे............$$$$$

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  • इश्क ने 'गालिब' निकम्मा कर दिया,
  • वरना हम भी आदमी थे काम के............$$$$$

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