पाकिस्तानी शायरी प्रसिद्ध उर्दू शायरी


  • तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
  • किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं..............$$$$$

  • हदीसे-यार1 के उन्वाँ2 निखरने लगते हैं
  • तो हर हरीम3 में गेसू सँवरने लगते हैं..............$$$$$

  • हर अजनबी हमें मजरम4 दिखाई देता है
  • जो अब भी तेरी गली से गुज़रने लगते हैं..............$$$$$

  • सबा से करते हैं ग़ुरबत-नसीब5 ज़िक्रे-वतन
  • वो चश्मे-सुबह में आँसू उभरने लगते हैं..............$$$$$

  • वो जब भी करते हैं इस नुत्क़ो-लब6 की बख़ियागरी7
  • फ़िज़ा में और भी नग़मे बिखरने लगते हैं..............$$$$$

  • दरे-क़फ़स8 पे अँधेरे की मुहर लगती है
  • तो ‘फ़ैज़’ दिल में सितारे उतरने लगते हैं..............$$$$$

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  • दोनों जहान तेरी मुहब्बत में हार के
  • वो जा रहा है कोई शबे-ग़म1 गुज़ार के..............$$$$$

  • वीराँ है मैकदा ख़ुमो-सागर2 उदास है
  • तुम क्या गए कि रूठ गए दिन बहार के..............$$$$$

  • इक फ़ुर्सते-गुनाह मिली, वो भी चार दिन
  • देखे हैं हमने हौसले परवरदिगार के..............$$$$$

  • दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
  • तुझसे भी दिलफ़रेब3 हैं, ग़म रोज़गार के4..............$$$$$

  • भूले से मुस्करा तो दिए थे वो आज ‘फ़ैज़’
  • मत पूछ वलवले5 दिले नाकर्दाकार6 के..............$$$$$

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  • दिल में अब यूँ तेरे भूले हुए ग़म आते हैं
  • जैसे बिछड़े हुए काबे में सनम आते हैं..............$$$$$

  • एक-इक करके हुए जाते हैं तारे रौशन
  • मेरी मज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते हैं..............$$$$$

  • रक़्से-मैं1 तेज़ करो साज़ की लय तेज़ करो
  • सूए-मैख़ाना2 सफ़ीराने-हरम3 आते हैं..............$$$$$

  • कुछ हमीं को नहीं एहसान उठाने का दिमाग
  • वो तो जब आते हैं माइल-ब-करम4 आते हैं..............$$$$$

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  • बेदम हुए बीमार दवा क्यों नहीं देते
  • तुम अच्छे मसीहा हो शिफ़ा1 क्यों नहीं देते..............$$$$$

  • दर्दे-शबे-हिज्राँ2 की जज़ा3 क्यों नहीं देते
  • ख़ूने दिले बहशी4 का सिला5 क्यों नहीं देते..............$$$$$

  • मिट जाएगी मख़लूक़6 तो इंसाफ़ करोगे
  • मुन्सिफ़7 हो तो अब हश्र उठा क्यों नहीं देते..............$$$$$

  • हाँ नुक्ता-वरो8 लाओ लबो-दिल की गवाही
  • हाँ नग़मागरो साज़े-सदा क्यों नहीं देते..............$$$$$

  • पैमाने-जुनूँ9 हाथों को शरमाएगा कब तक
  • दिलवालों गिरेबाँ का पता क्यों नहीं देते..............$$$$$

  • बरबादिए-दिल जब्र नहीं ‘फ़ैज़’ किसी का
  • वो दुश्मने-जाँ है तो भुला क्यों नहीं देते..............$$$$$

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  • सितम सिखलाएगा रस्मे-वफ़ा ऐसे नहीं होता
  • सनम1 दिखलाएँगे राहे-ख़ुदा ऐसे नहीं होता..............$$$$$

  • गिनो सब हसरतें जो ख़ूँ हुई हैं तन के मक़तल2 में
  • मेरे क़ातिल हिसाबे-खूँबहा3, ऐसे नहीं होता..............$$$$$

  • जहाने दिल में काम आती हैं तदबीरें न ताज़ीरें4
  • यहाँ पैमाने-तललीमो-रज़ा5 ऐसे नहीं होता..............$$$$$

  • हर इक शब हर घड़ी गुजरे क़यामत, यूँ तो होता है
  • मगर हर सुबह हो रोजे़-जज़ा6, ऐसे नहीं होता..............$$$$$

  • रवाँ है नब्ज़े-दौराँ7, गार्दिशों में आसमाँ सारे
  • जो तुम कहते हो सब कुछ हो चुका, ऐसे नहीं होता..............$$$$$

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  • हमने सब शेर में सँवारे थे
  • हमसे जितने सुख़न1 तुम्हारे थे..............$$$$$

  • रंगों ख़ुश्बू के, हुस्नो-ख़ूबी के
  • तुमसे थे जितने इस्तिआरे2 थे..............$$$$$

  • तेरे क़ौलो-क़रार3 से पहले
  • अपने कुछ और भी सहारे थे..............$$$$$

  • जब वो लालो-गुहर4 हिसाब किए
  • जो तरे ग़म ने दिल पे वारे थे..............$$$$$

  • मेरे दामन में आ गिरे सारे
  • जितने तश्ते-फ़लक5 में तारे थे..............$$$$$

  • उम्रे-जाविदे6 की दुआ करते थे
  • ‘फ़ैज़’ इतने वो कब हमारे थे..............$$$$$

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  • कब याद में तेरा साथ नहीं, कब हात में तेरा हात नहीं
  • सद-शुक्र कि अपनी रातों में, अब हिज्र1 की कोई रात नहीं..............$$$$$

  • मुश्किल हैं अगर हालात वहां, दिल बेच आएँ, जाँ दे आएँ
  • दिल वालों कूचा-ए-जानाँ2 में क्या ऐसे भी हालात नहीं..............$$$$$

  • जिस धज से कोई मक़तल में गया, वो शान सलामत रहती है
  • ये जान तो आनी-जानी है, इस जाँ की तो कोई बात नहीं..............$$$$$

  • मैदान-वफ़ा दरबार नहीं, याँ नामो नसब3 की पूछ कहाँ
  • आशिक़ तो किसी का नाम नहीं, कुछ इश्क़ किसी की ज़ात नहीं..............$$$$$

  • गर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है, जो चाहो लगा दो डर कैसा
  • गर जीत गए तो क्या कहना, हारे भी तो बाज़ी मात नहीं..............$$$$$

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  • कोई तीर दिल में उतर गया, कोई बात लब पे अटक गई
  • ऐ जूनून तूने बुरा किया, मेरी सोच राह भटक गई..............$$$$$
  • बढे रूहों-जिस्म के फ़ासले, यहाँ इज्ज़तों की तलाश में
  • जो कली नवेदे-बहार थी, वाही बागबाँ को खटक गई..............$$$$$
  • जिसे नोचने थे चले सभी, यहाँ बाग्बानो-गुलो-समर
  • वो कली उमीदे-सेहर बनी, वो कली खुशी से चिटक गयी..............$$$$$
  • मुझे ज़िंदगी की तलाश में, कई माहो-साल गुज़र गए
  • मेरी सोच तख्तए-दार पर, जो लटक गयी सो लटक गयी..............$$$$$

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  • सूखे होंट, सुलगती आँखें, सरसों जैसा रंग
  • बरसों बाद वो देखके मुझको, रह जायेगा दंग..............$$$$$
  • माजी का वो लम्हा मुझको, आज भी खून रुलाये
  • उखडी-उखडी बातें उसकी, गैरों जैसे ढंग..............$$$$$
  • दिल को तो पहले ही दर्द की, दीमक चाट गयी थी
  • रूह को भी अब खाता जाए, तन्हाई का ज़ंग..............$$$$$
  • उन्हीं के सदके यारब मेरी, मुश्किल कर आसन
  • मेरे जैसे और भी हैं जो, दिल के हाथों तंग..............$$$$$
  • आज न क्यों मैं चूडियाँ अपनी, किर्ची-किर्ची कर दूँ
  • देखी आज एक सुंदर नारी, प्यारे पिया के संग..............$$$$$
  • शबनम कोई तुझसे हारे, जीत पे मान न करना
  • जीत वो होगी जब जीतेगी, अपने आप से जंग..............$$$$$

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  • मुहब्बतें जब शुमार करना, तो साजिशें भी शुमार करना
  • जो मेरे हिस्से में आई हैं वो, अज़ीयतें भी शुमार करना..............$$$$$
  • जलाए रक्खूँगी सुब्ह तक मैं, तुम्हारे रस्ते में अपनी आँखें
  • मगर कहीं ज़ब्त टूट जाए, तो बारिशें भी शुमार करना..............$$$$$
  • जो हर्फ़ लौहे-वफ़ा पे लिक्खे, हुए है उनको भी देख लेना
  • जो रायगां हो गयीं वो सारी, इबारतें भी शुमार करना..............$$$$$
  • ये सर्दियों का उदास मौसम, के धड़कनें बर्फ़ हो गयी हैं
  • जब उनकी यखबस्तगी परखना, तमाज़तें भी शुमार करना
  • तुम अपनी मजबूरियों के किस्से, ज़रूर लिखना विज़ाहतों से..............$$$$$
  • जो मेरी आंखों में जल-बुझी हैं, वो ख्वाहिशें भी शुमार करना

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  • मैंने रोका भी नहीं और वो ठहरा भी नहीं
  • हादसा क्या था, जिसे दिल ने भुलाया भी नहीं..............$$$$$
  • जाने क्या गुजरी के उठता नहीं शोर-ज़ंजीर
  • और सहरा में कोई नक्शे-कफ़े-पा भी नहीं..............$$$$$
  • बेनियाज़ी से सभी कर्यए-जां से गुज़रे
  • देखता कोई नहीं है के तमाशा भी नहीं..............$$$$$
  • वो तो सदियों का सफर कर के यहाँ पहोंचा था
  • तूने मुंह फेर के जिस शख्स को देखा भी नहीं..............$$$$$
  • किसको नैरंगिए अय्याम की सूरत दिखलाएं
  • रंग उड़ता भी नहीं नक्श ठहरता भी नहीं..............$$$$$

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  • जब बहार आई तो सहरा की तरफ़ चल निकला
  • सहने-गुल छोड़ गया, दिल मेरा पागल निकला..............$$$$$
  • जब उसे ढूँढने निकले तो निशाँ तक न मिला
  • दिल में मौजूद रहा, आँख से ओझल निकला..............$$$$$
  • इक मुलाक़ात थी, जो दिल को सदा याद रही
  • हम जिसे उम्र समझते थे, वो इक पल निकला..............$$$$$
  • वो जो अफ्सानए-ग़म सुनके हंसा करते थे
  • इतना रोए हैं के सब आँख का काजल निकला..............$$$$$
  • कौन अय्यूब परीशन है तारीकी में
  • चाँद अफ़लाक पे दिल सीने में बेकल निकला..............$$$$$

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  • गुलों में रंग भरे, बादे-नौ-बहार चले
  • चले भी आओ के गुलशन का कारोबार चले..............$$$$$
  • क़फ़स उदास है, यारो, सबा से कुछ तो कहो
  • कहीं तो बहरे-खुदा आज ज़िक्रे-यार चले..............$$$$$
  • कभी तो सुब्ह, तेरे कुंजे-लब से हो आगाज़
  • कभी तो शब, सरे-काकुल से मुश्क्बार चले
  • बड़ा है दर्द का रिश्ता, ये दिल ग़रीब सही..............$$$$$
  • तुम्हारे नाम पे आयेंगे ग़मगुसार चले
  • जो हम पे गुज़री सो गुज़री मगर शबे-हिजरां..............$$$$$
  • हमारे अश्क तेरी आकिबत संवार चले

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  • तेरी उम्मीद , तेरा इंतज़ार जब से है
  • न शब को दिन से शिकायत, न दिन को शब से है..............$$$$$
  • किसी का दर्द हो करते हैं तेरे नाम रक़म
  • गिला है जो भी किसी से, तेरे सबब से है..............$$$$$
  • हुआ है जब से दिले-नासुबूर बे क़ाबू
  • कलाम तुझ से नज़र को बड़े अदब से है..............$$$$$
  • अगर शरर है तो भड़के, जो फूल है तो खिले
  • तरह तरह की तलब तेरे रंगे-लब से है...............$$$$$
  • कहाँ गए शबे-फुर्क़त के जागने वाले
  • सितारए सहरी हम कलाम कब से है..............$$$$$

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  • तुम आए हो, न शबे-इंतज़ार गुजरी है
  • तलाश में है सहर, बार - बार गुज़री है..............$$$$$
  • जुनूं में जितनी भी गुज़री ब-कार गुज़री है
  • अगरचे दिल पे ख़राबी हज़ार गुज़री है..............$$$$$
  • हुई है हज़रते-नासेह से गुफ्तुगू जिस शब
  • वो शब ज़रूर सरे-कूए-यार गुज़री है..............$$$$$
  • वो बात सारे फ़साने में जिसका ज़िक्र न था
  • वो बात उनको बहोत नागवार गुज़री है..............$$$$$
  • न गुल खिले हैं, न उनसे मिले न मय पी है
  • अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है..............$$$$$
  • चमन पे गारते-गुलचीं से जाने क्या गुज़री
  • क़फ़स से आज सबा बे-करार गुज़री है..............$$$$$

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  • कभ-कभी याद में उभरते हैं नक्शे-माज़ी मिटे-मिटे से
  • वो आज़माइश दिलो-नज़र की वो कुर्बतें सी, वो फ़ासले से..............$$$$$
  • कभी-कभी आरजू के सेहरा में, आ के रुकते हैं क़ाफले से
  • वो सारी बातें लगाव की सी वो सारे उन्वां विसाल के से..............$$$$$
  • निगाहों-दिल को क़रार कैसा निशातो-ग़म में कमी कहाँ की
  • वो जब मिले हैं तो उनसे हर बार की है उल्फत नए सिरे से..............$$$$$
  • बहोत गरान है ये ऐशे-तनहा कहीं सुबुकतर कहीं गवारा
  • वो दर्दे-पिन्हाँ के सारी दुनिया रफीक़ थी जिसके वास्ते से..............$$$$$
  • तुम्हीं कहो रिन्दों-मुह्तसिब में है आज शब कौन फ़र्क ऐसा
  • ये आके बैठे हैं मैकदे में वो उठके आए हैं मैकदे से..............$$$$$

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