Ghazal shayari in hindi font

अधूरापन ख़तम हो जाता है,
तुम्हे पाकर....
दिल का हर तार गुनगुनाता है,
तुम्हे पाकर...
गम जाने किधर जाता है,
तुम्हे पाकर....
सब शिकवे दूर हो जाते है,
तुम्हे पाकर....
जानता हू चंद पलो का खेल है ये..
अफ़सोस नही रहता बाकी,
तुम्हे पाकर..
राह तकती, ये लम्बी पगड़ंड़िया ..
थक कर भी चैन पाती है आंखे,
तुम्हें पाकर..
तमाम मायुसिया छुप जाती है..
जिंदा लाश मानो उठ जाती है,
तुम्हे पाकर..
'तन्हा' मरना जीना सब भूल जाती है,
तुम्हारी बाहों में आकर..
बस तुम्हें पाकर.......
विक्रमसिंह नेगी
विक्रमसिंह नेगी
बड़ा बेचैन होता जा रहा हूं,
न जाने क्यूं नहीं लिख पा रहा हूं

तुम्हे ये भी लिखूं वो भी बताऊं,
मगर अल्फ़ाज़ ढूंढे जा रहा हूं

मोहब्बत का यही आ़गाज़ होगा,
जिधर देखूं तुम्ही को पा रहा हूं

कभी सूखी ज़मीं हस्ती थी मेरी,
ज़रा देखो मैं बरसा जा रहा हूं

किसी दिन इत्तेफ़ाकन ही मिलेंगे,
पुराने ख्वाब हैं दोहरा रहा हूं

मुझे आगोश में ले लो हवाओं,
गुलों से बोतलों में जा रहा हूं

शरारत का नया अंदाज़ होगा,
मैं शायद बेवजह घबरा रहा हूं

किसे परवाह है अब मंज़िलों की,
मोहब्बत के सफ़र पर जा रहा हूं

दिलों की नाज़ुकी समझे हैं कब वो,
दिमागों को मगर समझा रहा हूं

शब-ए-फ़ुरकत की बेबस हिचकियों से,
तसल्ली है कि मैं याद आ रहा हूं

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मोहब्बत थी कहां हिस्से में ,
गज़ल से यूं ही दिल बहला रहा हूं..
है दिल में ख़वाईश की तुझसे इक मुलाक़ात तो हो,
मुलाक़ात ना हो तो फिर मिलने की कुछ बात तो करो,
मोती की तरह समेट लिया है जिन्हे दिल-ए-सागर मे,
ख़वाब सज़ा के, उन ख्वाबों को रुस्वा ना करो…
बहुत अरमान है की फिर से खिले कोई बहार यहाँ,
ये मालूम भी है की जा कर वक़्त आया है कहाँ,
हवा चलती है तो टूट जाते है ह्रे पत्ते भी तो कई,
तो सूखे फूलों से खिलने की तुम इलत्ज़ा ना करो…
ना ग़म करना तुम, ना उदास होना कभी जुदाई से,
वक़्त क्ट ही जाएगा तुम्हारा मेरी याद-ए-तन्हाई से,
ये दुनिया रूठ जाए हमसे तो भले ही रूठी रहे,
सच मर जाएँगे हम, तुम सनम रूठा ना करो…
लम्हा दर लम्हा बसे रहते हो मेरे ख़यालों मे,
ज़िक्र तुम्हारा ही होता है मेरे दिल के हर सवालों मे,
लो लग गयी ना हिचकियाँ तुम्हे अब तो कुछ समझो, 
कह दो की  मेरे बारे मे इतना सोचा ना करो…

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आँख खुलते ही ओझल हो जाते हो तुम,
ख्वाब बन के ऐसे क्यों सताते हो तुम…
गमों को भुलाने का एक सहारा ही सही,
मेरे मुरझाए हुए दिल को बहलाते हो तुम…
दूर तक बह जाते है जज़्बात तन्हा दिल के,
हसरतों के क़दमों से लिपट जाते हो तुम…
शीश महल की तरह लगते हो मुझको तो,
खंडहर हुई खव्हाईशोँ को बसाते हो तुम…
यादों की तरह क़ैद रहना मेरी आँखों मे,
आँसू बन कर पलकों पे चले आते हो तुम…
तुम्हारी अधूरी सी आस मे दिल ज़िँदा तो है
साँस लेने की मुझको वजह दे जाते हो तुम…


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ख्वाबों और ख़्यालों का चमन सारा जल गया,
ज़िंदगी का नशा मेरा धुआ बन कर उड़ गया…
जाने कैसे जी रहे है, क्या तलाश रहे है हम,
आँसू पलकों पर मेरी ख़ुशियों से उलझ गया…
सौ सदियों के जैसे लंबी लगती है ये ग़म की रात,
कतरा कतरा मेरी ज़िंदगी का इस से आकर जुड़ गया…
मौत दस्तक दे मुझे तू, अब अपनी पनाह दे दे,
ख़तम कर ये सिलसिला, अब दर्द हद से बढ़ गया…

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कुछ बातें हम से सुना करो,
कुछ बातें हम से किया करो,
मुझे दिल की बात बता दो तुम,
होंठ ना अपने सिया करो,
जो बात लबों तक ना आए,
वो आंखों से कह दिया करो,
कुछ बातें कहना मुश्किल है,
तुम चहरे से पढ़ लिया करो,
जब तनहा-तनहा होते हो,
आवाज मुझे तुम दिया करो,
हर धड़कन मेरे नाम करो,
हर सांस मुझको दिया करो,
जो खुशियां तेरी चाहत हैं,
मेरे दामन से चुन लिया करो।

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खूबसूरत है वो बातें जिनमे,
शामिल हों दोस्ती और
प्यार की किस्से, कहानियाँ,
खूबसूरत है वो आँखे जिनमे,
किसी के खूबसूरत ख्वाब समा जाए,
खूबसूरत है वो हाथ जो किसी के,
लिए मुश्किल के वक्त सहारा बन जाए,
खूबसूरत है वो सोच जिस मैं,
किसी कि सारी ख़ुशी झुप जाए,
खूबसूरत है वो दामन जो,
दुनिया से किसी के गमो को छुपा जाए,
खूबसूरत है वो किसी के,
आँखों के आसूँ जो
किसी के ग़म मे बह जाए..

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आंख जब भी बंद किया करते हैं..
सामने आप हुआ करते हैं..
आप जैसा ही मुझे लगता है..
ख्वाब मे जिससे मिला करते हैं..
तू अगर छोडके जाता है तो क्या..
हादसे रोज़ हुआ करते हैं..
नाम उनका ना, कोई उनका पता..
लोग जो दिलमे रहा करते हैं..
हमने “राही” का चलन सीखा है..
हम अकेले ही चला करते हैं..


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भुलाना भी चाहें भुला न सकेंगे
किसी और को दिल में ला न सकेंगे.....

भरोसा अगर वो न चाहें तो उन को
कभी प्यार का हम दिला न सकेंगे.......

वादा निभायेंगे, वो जानते हैं
कसम हम को झूठी खिला न सकेंगे......

क्यों आते नहीं वो है मालूम हम को
नज़र हम से अब वो मिला न सकेंगे......

ज़ोर-ए-नशा-ए-निगाह अब नहीं है
मय वो नज़र से पिला न सकेंगे............

हकीकत से अपनी वो वाकिफ़ हैं खुद ही
कर हम से अब वो गिला न सकेंगे........

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तुम आए, दिलजोई हुई
मुस्कुरा पड़ी आँख रोई हुई

महक उठीं कलियाँ जज्बात की
शबनमे-अश्क़ से धोई हुई

मचल-मचल गईं आज
हसरतें दिल की सोई हुई

शमए-आरजू थी दिल में
बुझी-बुझी, खोई हुई

सोचते रहे ता-उम्रे-फ़िराक़
खता कब हमसे कोई हुई

रो-रोकर तुम्हारी याद में
अफ़साने हुए, गज़लगोई हुई

ज़िंदगी

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वफ़ा मिली ना प्यार मिला ज़िंदगी में
मिला भी तो क्या मिला ज़िंदगी में

न दोस्त, न हमदम, न हमनवा कोई
करें तो किससे करें गिला ज़िंदगी में

दर्द के फूल, दर्द की कलियाँ
दर्द का ही बाग़ खिला ज़िंदगी में

बहुत-बहुत तो मिला नहीं थोड़ा भी
थोड़ा-थोड़ा ही बहुत मिला ज़िंदगी में

दर्द भरे गीत गुनगुनाता हूँ मैं
मेरी आदत है, दर्द में चैन पाता हूँ मैं

कभी तन्हाई ने गले लगाया था मुझको
अब तन्हाई को गले लगाता हूँ मैं

अजीब हालत है- दिल की ही सुनता हूँ
दिल को ही अपनी बात सुनाता हूँ मैं

सुना था- किसी के रोने पर हँसती है दुनिया
लो अब रोकर दुनिया को हँसाता हूँ मैं

  क्या लिखूं.

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कुछ जीत लिखूं या हार लिखूं,या दिल का सारा प्यार लिखूं.
कुछ अपनो के जज़्बात लिखूं या सपनो की सौगात लिखूं.

मैं खिलता सूरज आज लिखूं या चेहरा चाँद गुलाब लिखूं.
वो डूबते सूरज को देखूं या उगते फूल की साँस लिखूं.

वो पल मैं बीते साल लिखूं या सदियों लंबी रात लिखूं.
मैं तुमको अपने पास लिखूं या दूरी का अहसास लिखूं.

मैं अंधे के दिन मैं झाकूँ या आँखों की मैं रात लिखूं.
मीरा की पायल को सुन लून या गौतम की मुस्कान लिखूं.

बचपन मैं बच्चों से खेलूँ या जीवन की ढलती शाम लिखूं.
सागर सा गेहरा हो जौन या अंबार का विस्तार लिखूं.

वो पहेली पहेली प्यास लिखूं या निस्छल पहेला प्यार लिखूं.
सावन की बारिश मैं भीगूं या आँखों की मैं बरसात लिखूं.

गीता का अर्जुन हो जौन या लंका रावण राम लिखूं.
मैं हिंदू मस्लिन हो जाउ या बेबस सा इंसान लिखूं.

मैं एक ही मज़हब को जी लून या मज़हब की आँखें चार लिखूं.

कुछ जीत लिखूं या हार लिखूं,या दिल का सारा प्यार लिखूं

its me & my wife
its me & my wife

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एक लड़की मुझे सताती है’ .................

अंधेरी-सी रात में एक खिड़की डगमगाती है,
सच बताऊँ यारों तो,
एक लड़की मुझे सताती है।
भोली भाली सूरत उसकी मखमली-सी पलकें है,
हल्की इस रोशनी में,
मुझे देख शर्माती है!
सच बताऊँ यारों तो इक लड़की मुझे सताती है,
बिखरी-बिखरी ज़ुल्फ़ें उसकी
शायद घटा बुलाती है,
उसके आँखों के काजल से बारिश भी हो जाती है,
दूर खड़ी वो खिड़की पर मुझे देख मुसकुराती है।
सच बताऊँ यारों तो इक लड़की मुझे सताती है,
उसकी पायल की छम-छम से
एक मदहोशी-सी छा जाती है
ज्यों की आंख बंद करूँ मैं तो सामने वो जाती है,
सच बताऊँ यारों तो इक लड़की मुझे सताती है!
अंधेरी-सी रात में एक खिड़की डगमगाती है,
ज्यों ही आँख खोलता हूँ
मैं तो ख़्वाब वो बन जाती है
रोज़ रात को इसी तरह
इक लड़की मुझे सताती है।
विक्रमसिंह नेगी
विक्रमसिंह नेगी
तुम आए, दिलजोई हुई
मुस्कुरा पड़ी आँख रोई हुई

महक उठीं कलियाँ जज्बात की
शबनमे-अश्क़ से धोई हुई

मचल-मचल गईं आज
हसरतें दिल की सोई हुई

शमए-आरजू थी दिल में
बुझी-बुझी, खोई हुई

सोचते रहे ता-उम्रे-फ़िराक़
खता कब हमसे कोई हुई

रो-रोकर तुम्हारी याद में
अफ़साने हुए, गज़लगोई हुई

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