Good morning shayari sms messages 2016



सूरज की किरण रौशनी लाती है;
उठते ही आपकी याद आती है;
हम तो जाग गए आपकी यादों की दस्तक से;
अब देखना है आपको हमारी याद कब आती है।
सुप्रभात!

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ये भी एक दुआ है खुदा से;
किसी का दिल ना दुखे मेरी वजह से;
ऐ खुदा कर दे कुछ ऐसी इनायत मुझ पर, कि खुशियाँ ही खुशियाँ मिलें सबको मेरी वजह से।
सुप्रभात!


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सुप्रभात का उजाला सदा आपके साथ हो;
हर दिन का एक-एक पल आप के लिए कुछ ख़ास हो;
दुआ हमेशा निकलती है दिल से आपके लिए;
ढेर खुशियों का खज़ाना आपके पास हो।
सुप्रभात!

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तुम जिसे चाहो अपना अंदाज़ दे देना;
हक़ इतना सा मुझे आज दे देना;
नज़रें दुनियां की जब तुम्हें तन्हा छोड़ दें;
बस उस मोड़ पर मुझे एक आवाज़ दे देना।

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सूरज निकल रहा है पूरब से;
दिन शुरू हुआ आपकी याद से;
कहना चाहते हैं हम आपको दिल से;
हर दिन हो जाये अच्छा आपकी प्यारी सी मुस्कान से।
सुप्रभात!

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नयी-नयी सुबह, नया-नया सवेरा;
सूरज की किरणों में हवाओं का बसेरा;
खुले आसमान में सूरज का सवेरा;
मुबारक़ हो आपको ये हसीं सवेरा।

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ताज़ी हवा में फूलों की महक हो;
पहली किरण में चिड़ियों की चहक हो;
जब भी खोलो आप अपनी पलकें,
उन पलकों में बस खुशियों की झलक हो।
सुप्रभात!

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अज़ीज़ भी वो हैं, नसीब भी वो हैं;
दुनिया की भीड़ में करीब भी वो हैं;
उनके आशीर्वाद से हैं चलती ज़िंदगी;
खुदा भी वो हैं और तकदीर भी वो हैं।
सुप्रभात!

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सूरज तू उनको मेरा पैगाम देना;
ख़ुशी का दिन और हंसी की सुबह देना;
जब वो देखें तुझे बाहर आकर;
तो उनको मेरा सुप्रभात कहना।

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मौसम की बहार अच्छी हो;
फूलों की कलियाँ कच्ची हों;
हमारे ये रिश्ते सच्चे हों;
ऐ रब तेरे से बस एक दुआ है;
कि मेरे यार की हर सुबह अच्छी हो।
सुप्रभात!

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हर सुबह निकल पड़ता है जो खुद की तलाश में;
वो खोई हुई सी एक पहचान हूँ मैं;
ना आँखों में ख्वाब है ना दिल में तमन्ना कोई;
अपनी बनाई हुई राहों से ही अनजान हूँ मैं।
सुप्रभात!

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यमराज ऑन अर्थ


पात्र : यमराज और दो यमदूत, कुछ अन्य पात्र स्वसुविधानुसार रखे
जा सकते हैं

पहला दृश्य

यमलोक का सीन, जिसे स्वसुविधानुसार व्यवस्थित किया जा
सकता है। 
यमराज एक तरफ अपने सिंहासन पर बैठे हैं। उनके पास दो
यमदूत खड़े हैं। 

यमदूत1 : बॉस, आज आप कुछ परेशान दिखाई दे रहे हैं। 
यमराज : हम अब अपने काम से प्रसन्न नहीं हैं। 
यमदूत : क्यों बॉस !? 

यमराज : दरअसल, पहले अक्सर हमारे पृथ्वीलोक के टूर बनते
रहते थे। कुछ बेहतरीन आत्माओं को लेने हमें स्वयं पृथ्वीलोक
जाना पड़ता था। इससे अच्छा-खासा टी.ए., डी.ए. भी बन
जाता था। 
यमदूत1 : हाँ सो तो है बॉस। थोड़ा-बहुत आपके साथ हम
लोगों का कल्याण भी हो जाता था। (फीकी हंसी हंसता है) 
यमदूत2 : बॉस, आप तो हमेशा से यह काम कर रहे थे,
तब हाईकमान ने अचानक अब सारा सिस्टम क्यों बदल दिया ? 

यमराज : दरअसल, अब एक तो अच्छी आत्माएँ पृथ्वीलोक पर
बहुत कम बची हैं, दूसरे भैंसे से जाने पर हमें बहुत टाइम भी लग
जाता था। कुछ अच्छी आत्माओं ने पिछले दिनों हाइकमान से जब
हमारे भैंसे की स्लो स्पीड के बारे में बताया, तो उन्होंने हमारे भैंसे
को भी नौकरी से हटा दिया। अब उसका सारा खर्चा मुझे ही उठाना
पड़ा रहा है आप लोग तो जानते ही हैं कि अपने भैंसे की डाइट
कितनी हैवी है। 
यमदूत1 : यस, सर पर डे दो क्वींटल काजू-बादाम से तो उसका
ब्रेकफास्ट होता है। 

यमराज : खैर, असली बात ये है कि मैंने हाईकमान को एक महीने
की छुट्टी की एप्लीकेशन दी है। मैं तुम लोगों के साथ एक महीना
पृथ्वीलोक पर बिताना चाहता हूँ। 
यमदूत (दोनों) : रियली सर ! 

यमराज : यस, डेफिनेटली ! 
(तभी यमराज के मोबाइल की घण्टी बज उठती है।) 
यमराज : हैलो...ओह यस सर...गुड मार्निंग सर...हाँ...हाँ सर...अरे
नहीं सर...ऑनली वन मन्थ सर...हाँ...हाँ... जी...ओ के...थैंक्यू,
थैंक्यू सर ! (फोन बन्द करते हुए) हाईकमान का फोन था, वन
मन्थ लीव सैंग्शन हो गई हैं। 

यमदूत 1 : वॉऊ ! मजा आ गया सर ! 
यमराज : तो तैयारी शुरू करो, कल निकलना है। 
यमदूत (दोनों) : ओ. के. बॉस !

दूसरा दृश्य

(मंच के पीछे पर्दे पर पृथ्वीलोक से जुड़े दृश्य दिखाये जा सकते हैं) 

यमराज : यमदूत, हम लोग एक अर्से बाद पृथ्वीलोक पर आये हैं,
यहाँ तो सब उलट-पुलट हो गया है। 
यमदूत 1 : (अपने दुपट्टे से पसीना पोंछते हुए) यस बॉस, बहुत
गर्मी भी लग रही है इस बार तो। 
यमदूत 2 : बॉस, धूल-धुएँ से इस बार तो साँस लेने में भी प्रॉब्लम
हो रही हैं। 
यमराज : इंसान तो लगता है इस स्वर्ग से भी सुन्दर धरती का
कबाड़ा कर के रख दिया। 

यमदूत 1 : चारों तरफ कचरे के ढेर और गन्दे नाले दिखाई दे रहे हैं।
(एक तरफ इशारा करते हुए) ये नाला देखिए बॉस, पिछली बार जब
हम यहाँ आए थे तो यहाँ कोई नदी होती थी, क्या नाम था उसका...
(सोचता है) 
यमदूत 2 : यमुना नदी, अरे ये वही नदी है, लेकिन इंसान ने इसमें
इतना कचरा बहाया है कि ये गंदे नाले से भी बद्तर हो गई है। 

यमदूत 1 : अरे बाप रे ! इसका मतलब तो इंसान ने सारी नदियों
का ऐसे ही सत्यानाश कर दिया होगा। 
यमराज : और क्या, वो देखो...वो गंगा नदी है, देखो इसकी भी क्या
हालत बना दी इस इंसान ने। 
यमदूत 2 : (आश्चर्य से) गंगा !...क्या ये गंगा नदी है !...ये तो
बड़ी कमजोर और मैली दिखाई दे रही है। 
यमराज : चलो, आगे चलते हैं, मुझसे गंगा की ऐसी हालत नहीं
देखी जा रही। 

यमदूत 1 : चलिए, बॉस चलिए... हम भी गंगा की ऐसी हालत
नहीं देख सकते। 
(आगे बढ़ते हैं तो कुछ लोग जंगल काटते दिखाई देते हैं।) 
यमदूत 2 : अरे बॉस, ये बेवकूफ तो अंधा-धुंध पेड़ों को काटे जा
रहे हैं। 
यमराज : (दुःख से) हाँ, मैं भी देख रहा हूँ। 

यमदूत 1 : लेकिन बॉस कुछ करिए, अन्यथा ये मूर्ख तो इस पूरी
धरती को ही उजाड़ देंगे। 
यमराज : डीयर यमदूतों ! हम कुछ नहीं कर सकते। दरअसल,
हाईकमान ने चलते हुए हमें सख्त हिदायत दी थी कि पृथ्वीलोक
पर पहुँच कर हम अपनी शक्तियों को प्रयोग न करें। मनुष्य के
किसी भी काम में टाँग न अड़ायें। 
यमदूत 2 : लेकिन हम इन्हें ये तो बता सकते हैं कि पेड़ों के
बिना इसान संकट में पड़ जाएगा। 

यमराज : इंसान ये सब जानता है, वह पेड़ों के महत्व को
भली-भांति समझता है, लेकिन थोड़े से लाभ के लिए वह
अमूल्य पेड़ों को कटवाने से नहीं चूकता। ऐसा करके वह
निश्चित रूप से अपने पैरों पर ही कुल्हाड़ी मार रहा है।
आज दिनों-दिन पृथ्वी पर जो मौसम गर्म हो रहा है
उसमें तेजी से कट रहे जंगलों की बहुत बड़ी भूमिका है। 

यमदूत 1 : चलिए बॉस, आगे चलते हैं, ये मूर्ख तो धरती को
उजाड़ कर ही मानेंगे। 
(आगे बढ़ते हैं, नेपथ्य से गाड़ियों की, मशीनों की घरघराहट
आदि की आवजें आती हैं।) 
यमदूत 1 : मेरा तो दर्द के मारे सर फटा जा रहा है। 
यमदूत 2 : मुझे तो इस धूल-धुएँ से चक्कर आ रहे हैं,
लगता है वॉमिटिंग हो जाएगी।

(सिर पकड़ के एक तरफ बैठ जाता है और उल्टियाँ करने का
अभिनय करता है। थोड़ी देर में यमदूत-1 सहारा देकर उठाता है।)
तभी यमराज के मोबाइल की घण्टी बजती है। 
यमराज : हैलो...ओह ! गुडमार्निंग सर...हाँ सर, सुना तो
मैंने भी है...अच्छा सर, ओ के...ओ. के. सर। 
यमदूत 2 : किसका फोन था बॉस ? 

यमराज : स्वर्गलोक से हाईकमान का फोन था, कह रहे थे कि
पृथ्वीलोक पर स्वाइन फ्ल्यू नाम की महामारी फैली हुई है, अतः
हम लोग जल्दी वापस यमलोक लौट आएं और साथ ही अपना
पूरा चैकअप कराके सर्टिफिकेट भी साथ लाएँ। (थके और उदास
स्वर में) यमदूतों ! हमें पृथ्वी पर आये कितना टाइम हो गया ? 
यमदूत 1 : आई थिंक, टू डेज़ सर ! 

यमराज : ऑनली टू डेज़ ! लगता ऐसा है जैसे महीनों गुज़र गए
हैं। धरती का जो हाल है उससे अब और समय यहाँ बिताना हमारे
लिए खतरे से खाली नहीं रहेगा। वॉट यू थिंक ? 
यमदूत 2 : (थके स्वर में) यू आर राइट सर ! मेरे ख्याल से हमें
यमलोक वापस चलना चाहिए। 


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चारपाई पे बैठी तन्हाई
मेघदूत को भिजवा देता
पर शहर तो तेरा मेघत्रस्त है |
विद्युत संवाद किये देता हूँ
दूरभाष वालों को तो आज दस्त है |

ये सन्देश मिले उस   रूपसी  को
जो मेरी बिन्दङी   सी  दिखती हो  |
ग़र दिखे  वो  बिन्दङी  सी  मेरी
आँखों में   मेरी ही  तस्वीर दिखती हो  |

पढ़ लेवें वो भी जो
मेरी प्रेयसी के सगे लगते हैं |
प्रिया के मुंह से मेरे क़िस्से
सुनकर जो दुःख में भी चहकते हैं |

विषय न जानूँ अये किन्नू
क्या लिखूं इस पैग़ाम का |
इसे समझ लेना आंगन में मेरे
नेह -निमंत्रण तेरी यादों की बारात का |

तुम न हो तो आँगन में
कोई चारपाई पे बैठी रहती है |
कहती है तेरी याद है
पर वो तन्हाई सी दिखती है |

वो  ख़िज़ायें  वो  बहारें
जो  उसने तुझे दिखाई है |
सब  झूठे  हैं  ऐसा कहके
मुझे  वो हर शु  बहुत  चिढाती है |

करके याद तेरी बातों को
जब मैं बे-बात ही हँसता हूँ |
दीवाना हो कहके वो श्यामा
बड़ी ज़ोर से ठिठकती है |

अपनी शोख़ी और अदा से
मुझे बहुत रिझाती है |
तारीफ़ में तेरी सुख़न सुनाकर
मैं भी बहुत जलाता हूँ |

लाख करे कोशिश वो
लेकिन उसकी शोख़ी में ना आऊंगा |
तुम ना डरना हे प्रिये
हमेशा तेरे ही गीत मैं गाऊंगा |

पर प्रिये ऐसा ना हो
मेरी आँखे पानी पी सो जाये |
और मेरे ही आँगन में
तन्हाई जलसा-ओ-दावत मनाये |

देर ना करना अये किन्नू
यहाँ हिज्राँ की बदरी छायी है |
तुम आओगी ऐसा कहके
तेरे यादों की बारात बुलाई है |

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शिकायत है उन्हें कि,
हमें मोहब्बत करना नही आता,
शिकवा तो इस दिल को भी है,
पर इसे शिकायत करना नहीं आता.

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न रास्ता सुझाई देता है,
न मंजिल दिखाई देती है,
न लफ्ज़ जुबां पर आते हैं,
न धड़कन सुनाई देती है,
एक अजीब सी कैफियत ने
आन घेरा है मुझे,
की हर सूरत में,
तेरी सूरत दिखाई देती है...

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यादों की किम्मत वो क्या जाने,
जो ख़ुद यादों के मिटा दिए करते हैं,
यादों का मतलब तो उनसे पूछो जो,
यादों के सहारे जिया करते हैं...

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हम तो हर बार मोहब्बत से सदा देते हैं
आप सुनते हैं और सुनके भुला देते हैं

ऐसे चुभते हैं तेरी याद के खंजर मुझको
भूल जाऊं जो कभी याद दिला देते हैं

ज़ख्म खाते हैं तेरी शोख नीगाही से बोहोत
खूबसूरत से कई ख्वाब सजा लेते हैं

तोड़ देते हैं हर एक मोड़ पे दील मेरा
आप क्या खूब वफाओं का सिला देते हैं

दोस्ती को कोई उन्वान तो देना होगा
रंग कुछ इस पे मोहब्बत का चढा देते हैं

तल्खी ऐ रंज ऐ मोहब्बत से परीशां होकर
मेरे आंसू तुझे हंसने की दुआ देते हैं

हाथ आता नही कुछ भी तो अंधेरों के सीवा
क्यूँ सरे शाम यूँ ही दील को जला लेते हैं

हम तो हर बार मोहब्बत का गुमा करते हैं
वो हर एक बार मोहब्बत से दगा देते हैं

दम भर को ठहरना मेरी फितरत न समझना
हम जो चलते हैं तो तूफ़ान उठा देते हैं

आपको अपनी मोहब्बत भी नही रास आती
हम तो नफरत को भी आंखों से लगा लेते

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आँख में पानी छलकता

आँख में पानी छलकता वीर वानी क्या कहूं ?
मिट गया नामों निशाँ उनकी निशानी क्या कहूं ?

देश की इज्जत बचाने में कटाए सर कभी |
मिल गयीं जो गर्दिशों में जिंदगानी क्या कहूं ?

था सिपाही एक मंगल क्रांति ज्वाला फूंक दी |
ज्वाल पाण्डे की चली थे खानदानी क्या कहूं ?

शेरनी लक्ष्मी वही जो थी दीवानी जंग की |
जंग में अग्रेज हारे वो जवानी क्या कहूं ?

चन्द्रशेखर और बिस्मिल भगत सिंह क्या वीर थे ?
शेर जो अशफाक उल्ला की कहानी क्या कहूं ?

हिन्द वासी बोस नेता हिन्द ए आजाद फ़ौज |
खूब मारे थे फिरंगी हिन्द पानी क्या कहूं ?

शिव बताता है सही गुल पाहनों से थे हुए |
वीर वानी है गजल हमको है गानी क्या कहूं


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दो आईने को देखकर देखा किया तुझे
तेरी आंखों में डूबकर देखा किया तुझे
सुन ले जरा क्या कह रही तुमसे मेरी निगाह
खामोशियों से बोलकर देखा किया तुझे
लहरें तो आके रूक गईं साहिल को चूमकर
आंसू पलक में रोककर देखा किया तुझे
तेरी उदासियों में तस्वीर है मेरी
ये सोचके बस एकटक देखा किया तुझे

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गिडगिडाना है नहीं अब जोर की हुंकार हो |
याचना निष्फल हुई तलवार में अब धार हो ||

राजनीती बन चुकी है दो मुहों की सर्पिणी |
दूध देना व्यर्थ है अब शेष की फुफकार हो ||

आज कल जनता जनार्दन पर लाठियां चल रहीं |
चक्र धारी तुम बनों मृतप्राय अब गद्दार हो ||

हुक्मरानों का हुआ है रक्त दूषित अब यहाँ |
वो निकलना है जरूरी तीर आरम्पार हो ||

त्याग दो अब वस्त्र भगवा वीरता ललकार हो |
अब सियासी पर्वतो पर वज्र जैसी मार हो ||

मुफ्लिसी की मार से कंगाल अब कंकाल है |
जी रहे है लाश बन लाचार पर ना वार हो ||

रक्त रंजित मेदिनी हो जायेगी सुन बेरहम |
कह रहा शिव छोड़ गद्दी तेरा भी उद्धार हो ||


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सुबह का हर पल अरमान बनके आये; दिन का उजाला नई शान बनकर आये; 
चमकती रहे आपके चेहरे पर हंसी; 
हर नया दिन ऐसा मेहमान बनकर आये।
गुड मॉर्निंग!

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फिजा में महकती शाम हो तुम;
प्यार में झलकता जाम हो तुम;
सीने में छुपाए फिरते हैं हम यादें तुम्हारी;
इसलिए मेरी जिंदगी का दूसरा नाम हो तुम।
सुप्रभात!

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दोस्ती एक प्यार भरा पैगाम है;
ये तो सबसे खूबसूरत रिश्ते का नाम है;
आंसू के बदले हंसी देना इसका काम है;
इस मजबूत बंधन को दिल से सलाम है। सुप्रभात!

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तेरी हर सुबह मुस्कुराती रहे;
तेरी हर शाम गुनगुनाती रहे; 
तू जिसे भी मिले इस तरह से मिले; 
कि हर मिलने वाले को तेरी याद आती रहे।
गुड मॉर्निंग!

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इन बादलों का मिज़ाज खूब मिलता है मेरे अपनों से; 
कभी टूट के बरस जाते हैं; 
तो कभी बे-रुखी से गुजर जाते हैं। 
सुप्रभात!

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ईश्वर कहते हैं उदास ना हो मैं तेरे साथ हूँ;
सामने नहीं आस पास हूँ;
पलकों को बंद कर और दिल से याद कर;
मैं कोई और नहीं तेरा विश्वास हूँ।
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रात ने चादर समेट ली है; 
सूरज ने किरणें बिखेर दी है; 
चलो उठो और शुक्रिया करो अपने भगवान का; 
जिसने हमें ये प्यारी सुबह दी है।
गुड मॉर्निंग!
 विक्रमसिंह नेगी
विक्रमसिंह नेगी
जानवरों की विशेषताएं -:
बन्दर -  बुद्धिमान
कुत्ता – वफादार
आप कृपया इससे आगे मत पढ़ना …

मान जाओ …

मत पढ़ो …

गधा – वही करता है जिस काम को मना करो …. 

खुश थे अकेले सफ़र में हम ,कोई अनजाना मिल गया 
साथ चला यूं ऐसा लगा ज़माना मिल गया 
चलते -चलते हुआ वो मेहरबान हम पे कुछ इस तरह 
जैसे किसी बहते हुए सागर को किनारा मिल गया 
कुछ देर चला सफ़र में साथ,
जैसे प्यार में कोई आशिके दीवाना मिल गया..
मंजिल अलग है हमारी , मुश्किल है सफ़र हमारा.
बस मेरा इतना सा समझाना, 
और उसे अलग होने का बहाना मिल गया…

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मंज़िलो से अपनी डर ना जाना,
रास्ते की परेशानियों से टूट ना जाना,
जब भी ज़रूरत हो ज़िंदगी मे किसी अपने की,
हम आपके अपने है ये भूल ना जाना.


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जैसे सूरज के बिना सुबह नहीं होती;
चाँद के बिना रात नहीं होती;
बादल के बिना बरसात नहीं होती;
वैसे ही आपकी याद के बिना दिन की शुरुआत नहीं होती।
सुप्रभात!

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सुबह का मौसम और आपकी याद;
हलकी सी ठंडक और चाय की प्यास;
यारों की यारी और यारी की मिठास;
शुरू कीजिए अपना दिन मेरी सुप्रभात के साथ।
सुप्रभात!

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प्यारी-प्यारी सुबह है, बूँदों की बरसात है;
हवा भी थोड़ी ठंडी है, मौसम भी अनुकूल है;
प्यारी-प्यारी सुबह है, बस कहना सुप्रभात है।
सुप्रभात!

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एक और प्यारी सी सुबह हो गई;
ज़िंदगी की खुशनुमा फ़िज़ा हो गई;
मुबारक हो आपको आज का दिन;
जिसमें शामिल आपकी दुआ हो गई।
सुप्रभात!

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