Hindi love shayari with images 2016



बात कम कीजिये, जहालत छुपाते रहिये.

अजनबी दुनिया है,दोस्त बनाते रहिये.

दिल मिले न मिले,हाथ मिलाते रहिये.



दिल से मिलने कि तमन्ना ही नही जब दिल में,

हाथ से हाथ मिलाने की ज़रूरत क्या है.

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कौन किसी का साथ देता है जहां में ए दोस्त,
आखिरी वक्त तो पलके भी पलट जाती हैं.


इन्सान अपने आप में मजबूर है बहुत,
कोई नहीं है बेवफ़ा अफ़सोस मत करो.

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रोके जो मेरी राह ,वो मंजर नहीं आया.

अभी तक मेरी राह में समंदर नहीं आया ....


अपना अंजाम तो मालूम है सब को फिर भी,
अपनी नज़रों में हर इन्सान सिकंदर क्यूँ है.

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बरसों में मरासिम बनते हैं लम्हों में भला क्या टूटेंगे,
तू मुझ से बिछड़ना चाहे तो दीवार उठा धीरे धीरे.

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दिल वह नगर नही जो फिर आबाद हो सके
पछताओगे बहुत यह बस्ती उजाड़ के.

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हमने बना लिया है आशियाना नया;
जाओ यह बात फिर किसी तूफां से कह दो .

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कौन कहता है कि हम तुम में जुदाई होगी;
अरे यह हवा किसी दुश्मन ने उढाई होगी.

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मैंने यूं ही फेरी थी रेत में उंगलियां ;
देखा तो गौर से तेरी तस्वीर बन गयी.

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दिल वह नगर नही जो फिर आबाद हो सके
पछताओगे बहुत यह बस्ती उजाड़ के.

उस*मे से नही मतलब.. दिल जिस से है बेगाना..
मकसुद है उस*मे से.. दिल ही मे जो खिंचती है..
सूरज में लगे*धब्बा.. कुदरत के*करिश्में हैं..
बुत हमको कहें काफ़िर.. अल्लाह की मर्ज़ी है..

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‘‘आँख जो कुछ देखती है, लब पै आ सकता नहीं।
महवे-हैरत हूँ कि दुनिया क्या से क्या हो जायेगी।

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‘‘ऊँचे-ऊँचे मुजरिमों की पूछ होगी हश्र में।
कौन पूछेगा मुझे मैं किन गुनहगारों में हूँ।।’’

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उस मय से नही मतलब.. दिल जिस से है बेगाना..
मकसुद है उस मय से.. दिल ही मे जो खिंचती है..
सूरज में लगे*धब्बा.. कुदरत के*करिश्में हैं..
बुत हमको कहें काफ़िर.. अल्लाह की मर्ज़ी है..

कियों अच्छी भली गजल कि टांग तोड़ रहे हो
शब्द यह हैं................अंदर लाइन कर के रंग भी बदल दिया गया है

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सुनील भाई जी आपको सच में लगता है न
कि हाथ धो कर पीछे पड़े हुए हैं
देखो मैं अब तक भी शिकायत नही की है
अब सिर्फ इग्नोर ही कर रही हूँ .

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ये वफ़ा उन दिनों की बात हे....
जब मकान कच्चे और लोग सच्चे हुआ करते थे.

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समंदर में फ़ना होना तो किस्मत की निशानी हे,
जो मरते हे किनारों पर मुझे दुःख उन् पे होता हे....

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ठिकाना कब्र हे इबादत कुछ तो कर ग़ालिब,
कहावत हे खाली हाथ किसी के घर जाया नहीं करते....

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उस की जफ़ाओं ने मुझे एक तहेजीब सिखा दी हे,
में रोते हुए सो जाता हू पर सिकवा नहीं करता....

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ना जाने ज़मानेवालो को क्या अदावत हे हम से,
की जीस चीज को हम चाहे सब उस के तलबगार हो जाते हे....

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ठिकाना कब्र हे इबादत कुछ तो कर ग़ालिब,
कहावत हे खाली हाथ किसी के घर जाया नहीं करते....

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लम्हा-लम्हा जीना क्या और लम्हा-लम्हा मरना क्या
साथ तुम्हारा, साथ हमारे अगर रहे तो कहना क्या

हम-तुम दोनों एक छंद है शायर जिनको भूल गया
बोले, बाद इस छंद के अब तो कहना क्या, न कहना क्या

बूंद-बूंद साँसे आती है, बूंद-बूंद एक राह बनी
घुट-घुट कि बात में हमको, कहना क्या न कहना क्या

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मेरा ज़मीर मुझसे कहेता हे के क्या देखता हे अपने हाथो की लकीरों को.
वो तो तेरा तब भी ना था जब उसका हाथ तेरे हाथ में था.

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सौ बार ख़त निकलकर देखा है जेब से,

हम जो समझ रहे हैं,वो उसने लिखा नहीं....

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शायद प्यार में नहीं था दोस्ती सा दम..
शायद इस लिए दोस्त साथ निभाता रहा
मुझे पता ना चला क्या ज्यादा था या कम
मगर प्यार तो रास्ते भर रुलाता रहा...

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तुम्हारे घर में दरवाज़ा है लेकिन तुम्हे खतरे का अंदाज़ा नहीं है
हमें खतरे का अंदाज़ा है लेकिन हमारे घर में दरवाज़ा नहीं है |

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तुम्हारे घर में दरवाज़ा है लेकिन तुम्हे खतरे का अंदाज़ा नहीं है
हमें खतरे का अंदाज़ा है लेकिन हमारे घर में दरवाज़ा नहीं है |

इक रात ठहर जाये हम घर में तेरे लेकिन
छत पर न सुला देना हम नींद में चलते हे

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वफ़ा-ए-वा'दः नहीं, वा'दः-ए-दिगर भी नहीं
वो मुझसे रूठे तो थे, लेकिन इस क़दर भी नहीं
न जाने किसलिए उम्मीदवार बैठा हूँ
इक ऐसी राह पे जो तेरी रहगुज़र भी नहीं

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इस दुनिया में प्यार करनेवालो की कमी नहीं हे....
बस प्यार ही उस से हो जाता हे जो बेवफा हो.

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हमारे बाद नहीं आयेगा तुम्हें चाहत का ऐसा मज़ा
तुम लोगों से कहते फिरोगे, मुझे चाहो उसकी तरह

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मेरी हर मांगी हुई दुआ बेकार गयी फ़राज़
जाने किस शक्स ने चाहा था इतनी शिद्दत से उसे

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भीगी पालको के साथ आंखे नम थी,
ज़िंदगी उनसे सुरू उनही पे खतम थी॰
वो रूठ कर दूर चले गये हमसे ,
सायद हमारी मोहबत ऑरो से थोड़ी कम थी।

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लाजवाब यार!
मेरी हर मांगी हुई दुआ बेकार गयी फ़राज़
जाने किस शक्स ने चाहा था इतनी शिद्दत से उसे

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वाह वाह अल्ताफ राजा साब! क्या जुगलबंदी है!
इक रात ठहर जाये हम घर में तेरे लेकिन
छत पर न सुला देना हम नींद में चलते हे


तुम्हारे घर में दरवाज़ा है लेकिन तुम्हे खतरे का अंदाज़ा नहीं है
हमें खतरे का अंदाज़ा है लेकिन हमारे घर में दरवाज़ा नहीं है |

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हाथ जख्मी हुए तो कुछ अपनी ही खता थी,
लकीरों को मिटानेचला था किसी को पाने के लिए....

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कुछ खटकता तो है पहलू में मेरे रह-रहकर !

अब खुदा जाने, तेरी याद है या दिल मेरा !!

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प्यार क्या चीज हे मुझे क्या मालूम,
शायद ये वाही रिश्ता हे जो मेरा उससे और उसका किसी और से हे.

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लड़ना तो चाहा था उसने हालात से मगर

हाथो में उसके कागजी तलवार ही तो थी

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समंदर से कहे दो अपनी मौजो को संभाल कर रखे,
लोग ही काफी हे जिंदगी में तूफान लाने के लिए....

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हर सुबह उठ के तुझसे माँगू हूँ मैं तुझी को !

तेरे सिवाय मेरा कुछ मुद्दआ नहीं है !!


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लड़ना तो चाहा था उसने हालात से मगर

हाथो में उसके कागजी तलवार ही तो थी

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तबदीली जब भी आती हे मौसम की अदाओ में,
किसी का यु बदल जाना बहोत ही याद आता हे....

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तलवार के जख्मो की किसे फिक्र पड़ी हे
बातो से लगे घाव को भरने की दवा दे

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मेने पूछा पहला पत्थर मुझ पर कोन उठाएगा
आई इक आवाज की,तू जिसका मोहसिन कहलाएगा

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कोई खोफ खुदा कीजे,इस तरह न चलिए
सौ बार तो इस चाल पे तलवार चली हे

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इस सादगी पे कोन न मर जाये ऐ खुदा
लड़ते हे और हाथ में तलवार भी नहीं

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कहर हो या बला हो, या जो कुछ हो !

काश कि तुम मेरे लिए होते !!


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बहारो में न ऐ दिल मुस्कुराना
बना डालेगी यह दुनिया अफसाना

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आते आते मेरा नाम सा रह गया
उनके होंठों पे कुछ कांपता रह गया


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क्या करू उसे मोह्हबत नाम की भी नहीं हे


जिस पर मेने जान देदी ,वो मेरा नाम भी नहीं जानती

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चंद सिक्को में बिकता हे यहाँ इंसान का ज़मीर,
कोन कहेता हे, मेरे मुल्क में महेंगाई बहोत हे....

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आपके लिए उससे अच्छी लड़की कहीं और इंतज़ार कर रही होगी.

वो कहते हैं ना की भगवान् जो करता है,अच्छे के लिए ही करता है.

क्या बात कही हे मित्र इस बात के लिए दुबारा रेपुटेशननहीं दे पा रहा हू चलिये इंतजार करता हू दूसरी का

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कमाल का शख्स था जिसने मेरी जिंदगी तबाह कर दी,
राज की बात तो ये हे की दिल उस से खफा अब भी नहीं हे.

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बड़ी अजीब हे इस नादान दिल की ख्वाहिश,
आमाल दोजख के हे मगर तलबगार जन्नत के हे....

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ना थी जिसको मेरे प्यार की कदर, इत्तेफाक से उसी को चाह रहे थे हम,
उसी दिए ने जलाये मेरे हाथो को, जिसको हवा से बचा रहे थे हम....

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आंखे रो रही थी पर होठो को मुस्कुराना पड़ा,
दिल में था दर्द पर खुश हु जाताना पड़ा.
जिन्हें हम बता देना चाहते थे सब कुछ,
बारिस का पानी कह आंसुओ को छुपाना पड़ा.

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उजाले की दुनिया में अँधेरे बहोत है,
दिल के अँधेरे गहरे बहोत है.
कैसे कोई बनाये सपनो की दुनिया,
सपनो की दुनिया के लुटेरे बहोत है.

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कमाल का शख्स था जिसने मेरी जिंदगी तबाह कर दी,
राज की बात तो ये हे की दिल उस से खफा अब भी नहीं हे.

वाह मित्र क्या बात हे शानदार

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आज का ताजा शेर अर्ज करता हूँ

"प्यार ने मारा,राहगीरों ने मारा ,आखिर मारा परिवार ने

किसी से ना मिला सहारा,मगर उठा लिए मेरे यार ने"

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इस दर्जा खो गयी है मेरी कुव्वते शनास
कातिल को आज मैंने मसीहा समझ लिया |


इस दर्जा -इस हद तक
कुव्वते शनास-पहचानने की शक्ति

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खुद को पढता हूँ, फिर छोड़ देता हूँ.

रोज़ ज़िन्दगी का एक हर्फ़ मोड़ देता हूँ.....

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टूटे हुए सपने से
खुली, आज सुबह
फिर आँख
सपना, आज फिर
चुभता रहा, दिन-भर ।

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तेरे बगेर ऐसे जिए जा रहा हू में


जेसे कोई गुनाह किये जा रहा हू में

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खुद को पढता हूँ, फिर छोड़ देता हूँ.

रोज़ ज़िन्दगी का एक हर्फ़ मोड़ देता हूँ.....
हर लफ्ज़ किताबों में तेरा अक्स लिए है
एक फूल सा चेहरा हमें पढ़ने नहीं देता |



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लफ्जो में सिर्फ तेरा नाम है , और कोई ख्याल नहीं
हर अक्स में तू मुझे नजर आती है
और लोग पागल समझते है |

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उनके लरज़ते हुए हाथों ने मेरी कलाई को यूँ छुआ है ,,
मानो उनकी हर साँस पूछती हो -


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लफ्जो में सिर्फ तेरा नाम है , और कोई ख्याल नहीं
हर अक्स में तू मुझे नजर आती है
और लोग पागल समझते है |

इश्क ने कर दिया मनो भाई को निक्कमा

वरना आदमी ये भी बड़े काम के थे

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अक्सर देखा है
महोब्बत को नाकाम होते हुए
साथ जीने के वादे किए
फिर तनहा रोते हुए.......

जो हमेशा साथ निभाए..वो तो बस दोस्ती है
जो कभी ना रूलाए..वो तो बस दोस्ती है........
यूँ ही देखा है बचपन की दोस्ती को बूढा होते हूए
ना किए कभी वादे..पर हर वादे को पूरा होते हूए...॥

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ये तमन्ना है के मेरी ज़िन्दगी में आओ
और मुझे महोब्बत न करो...
ये इल्तज़ा है के मेरे दोस्त बन जाओ
और मुझे महोब्बत न करो......॥

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आखों को जाम लिखू जुल्फों को बरसात लिखू ,


जिससे नाराज़ हो उसी शक्स को दिल कि हर बात लिखू ,

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कुछ लोग यूहि शहर में हमसे खफा रहते है,


क्युकि हर इक से अपनी तबियत नहीं मिलती,

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तरह तुमको भी किसी कि तलाश थी,


हम जिसके भी करीब रहे उनको सुरु से ही किसी और कि तलाश थी,

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गम दिया है तो थोडा सा सकून दे दो,

मेरे खुद का होने का थोडा सकून दे दो,


कबसे मना रहा हू ए ग़ालिब तुझको



,थोडा तो प्यार का मरहम दे दो,

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उम्मीद ना रखना सच्चे प्यार से ए जाना,
बड़े प्यार से धोखा देते हे सिद्दत से चाहने वाले....

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ये सोच लिया हे की अब उस को आवाज नहीं देनी,
अब क्या में भी देखू वो मेरा तलबगार हे कितना....

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वाह वाह ...क्या बात कही...........

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sam जी बहुत अच्छा लिखा ह आपने

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एक खिलाडी!!!

जाने कहाँ खड़ा था मैं , कहाँ जाने का दिल था
पता ना चला कब वक़्त का पहिया चल पड़ा था
में बेबस सा देखता रह गया वो निकल पड़ा था
दोस्त था वो, मगर प्यार से कभी भी कम ना था |

आज जब याद आती है उसकी अखबार देख लेता हूँ
देखि तस्वीर उसकी तो निकलते हैं खुसी के आंसू
येही कहते हैं सारे झारखण्ड वाले, सारे देश वासी
जन्मदिन है आज उसका ये बोहतो को पता ना था
मगर आज किसी के भी दिल से वो अछूता ना था |

देश की आवाज,जवान दिलो की धड़कन है वो
बांझो का भी दुलारा बेटा है वो..एक आदर्श है वो
हर भारत वासी से जुड़ा है वो देश की शान है वो
भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति विशेस है वो
हर भारतीय के लिए गर्व की बात है वो
हर दुसरे देश के लिए जलने वाली बात है वो
दुश्मनों को पछाड़ता, जीत का मंत्र सिखाता है वो
सालो के सूखे को तोड़ कर देश का मान बढाया है वो |
हर किसी के दिल से जडित हम सबका महिंदर है वो
सिंह नाम जुडा है उसके, क्रिकेट का राजकुमार है वो
अब तो आप समझ ही गए के हम सबका धोनी है वो
प्यार पाने का हकदार और सर ऊँचा रखने वाला है वो!!!!!!

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जन्मदिन!!!
"आपके जन्मदिन पर तोहफा में क्या भेजूं...
जिसके पास हो सब कुछ उसे कुछ और क्या भेजूं...
खुस रहो हमेशा जीवन में बस येही दुआ भेजूं...
इस मुबारक मौके पर प्यार भरा एक पैगाम भेजूं..
लिखने का नहीं है दम मुझमे फिर भी कविता एक लिख भेजूं...
सोचा कभी मैंने के इस बार तुम्हे हीरो का हार भेजूं
फिर आया याद के जो हो तेरे बेकार उसे क्यों भेजूं...
जो दे ना पाया कभी आज वो तुझे प्यार भेजूं...
जिसके पास हो सब कुछ उसे कुछ और क्या भेजूं............."

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सच्चाई???...कैसी सच्चाई???..

हम तो यह कह रहे हैं के

दुसरे के प्यार को ना समझ बदनामी ए नासमझ,

समझ में जो आजाये वो प्यार ही क्या???


यार अपनी सचाई खुद बता रहे हो ,बदनाम मुझी क्यों करते हो

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एक हैं चेतना जी कर के वो पागल समझती हैं मनोज जी को.....हा हा ह अह ......ये थी सचाई ...मेने तो बात आगे बधाई बस

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अरे मित्र मजाक भी नहीं समझी क्या आप?

एक हैं चेतना जी कर के वो पागल समझती हैं मनोज जी को.....हा हा ह अह ......ये थी सचाई ...मेने तो बात आगे बधाई बस

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नासमझ तो वो ना थे इतना
के प्यार को हमारे समझ ना सके
पेश किया दर्द-ए-दिल हमने नगमों मे
उसे भी वो सिर्फ “शेर” समझ बैठे

बुराईया तो लाख देखी आपने
पर दिलमॅ ना कभी झाक सके
कुसूर तो आपका भी नही है जनाब
हम ही तो आपसे कभी कुछ कह ना सके

टूटे दिलको ना सहलाओ कभी,
अंगारे सुलगते है इस ख़ाक में,
टूटे दिलको ना सहलाओ कभी,
अंगारे सुलगते है इस ख़ाक में,
ना जल जाए हाथ आपका, ए मेरे दोस्त,
इस दिलको तो आदत है
इस दिलको तो अब आदत है

नासमझ तो वो ना थे इतना
के प्यार को हमारे समझ ना सके
पेश किया दर्द-ए-दिल हमने नगमों मे
उसे भी वो सिर्फ “शेर” समझ बैठे

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गम छुपाते रहे मुस्कुराते रहे
महफिलों महफिलों गुन गुनाते रहे
आंसुओं से लिखी दिल की तहरीर को
फूल की पत्तियों से सजाते रहे

गज़लें कुम्ला गईं नज्में मुरझा गईं
गीत सांवला गए साज़ चुप हो गए

फिर भी अहल -ए -चमन कितने खुश्जौक थे
नगमा -ए -फसल -ए -गुल गुनगुनाते रहे

वक़्त का हर क़दम भी भागता रहा
जाकत ले पावून भी दाग मताते रहे

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जो बंदिशें थी ज़माने की तोड़ आया हू


में तेरे वास्ते दुनिया को छोड़ आया हू

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जो बंदिशें थी ज़माने की तोड़ आया हू


में तेरे वास्ते दुनिया को छोड़ आया हू

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पत्थर से दिल लगा कर बर्बाद हो गए,
दिल शाद था मगर अब नाशाद हो गाए,
जिनके वफाओं पर ऐतबार था 'आज़ाद',
करके हमे तबाह वह खुद आबाद हो गए।

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बात मुद्दत के मुस्कुराने की रात आयी है,
हर एक वादा निभाने की रात आयी है,
वह जो दूर रहा करते थे साये से भी कभी,
सीने से उनको लगाने की रात आई हैं.

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उस गुलाब से पूछो दर्द क्या होता हैं !
जो हर वक़्त खामोश ही रहता हैं !!
औरो को देता हैं पैगाम-ऐ-मोहब्बत !
और खुद काँटों की चुभन को सहता हैं !!

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वो कहते हैं मजबूर हैं हम !
न चाहते हुए भी दूर हैं हम....!!
चुरा ली उन्होंने धड़कन भी हमारी !
फिर भी वो कहते हैं की बेकसूर हैं हम !!

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क्यों बनाया मुझको आए बनाने वाले !
बहुत गम देते हैं ये जमाने वाले....!!
मैंने आग के उजालों में कुछ चेहरों को देखा !
मेरे अपने ही थे मेरे घर जलाने वाले !!

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हमें किसी से कोई शिकायत नहीं !
शायद मेरी किश्मत में चाहत नहीं...!!
मेरी तक़दीर को लिखकर उपरवाले मुकर गए !
पूछा तो बोला ये मेरी लिखावट नहीं....!!

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हम अपनी जिंदगी ख़ुशी से लुटा दे !
अगर खुदा हमारी उम्र आपको लगा दे !!
और तो कुछ माँगा नहीं हमने खुदा से !
बस हर जन्म में आपको हमारा दोस्त बना दे !!

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बागो - बहारो में तुम ही अच्छे लगे !
लेकिन इसमें मेरा कोई कशुर नहीं !!
कशुर हैं तो सिर्फ इस दिल का...!
जिसे हजारो में तुम ही अच्छे लगे !!

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