Hindi Poems 2017

तेरा जाना दिल को कभी गँवारा ना हुआ....!!!
ऐसा रूठा हमसे फिर कभी हमारा ना हुआ....!!!
बहुत हसरत रही कि तेरे साथ चले हम....!!!
बस तेरी और से ही कभी इशारा ना हुआ....!!!
मौत अच्छी थी जिसने उठाया था मुझको....!!!
जिन्दगी यू तेरा मुझे कभी सहारा ना हुआ....!!!....!!!



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आप भी हैं....!!!हम भी हैं....!!!ऊपर तारे नीचे जमीं हैं।
दिल बेरंग है तो क्या....!!!यारो शाम तो रंगीन है।
दुनिया का क्या ये तो जवां है....!!!
पर है थकी थकी....!!!रवानी कहां है।
गर खुद पर यकीन है....!!!तो दुनिया हसीन है।
कुछ तरस खा ले....!!!जरा चढ़ा ले....!!!
हसीना ना सही....!!! जाम तो हसीन है।




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तप कर गमों की आग में कुंदन बने हैं हम;
खुशबू उड़ा रहा दिल चंदन से सने हैं हम;



रब का पयाम ले कर अंबर पे छा गए;
बिखरा रहे खुशी जग बादल घने हैं हम; 



सच की पकड़ के बाँह ही चलते रहे सदा;
कितने बने रकीब हैं फ़िर भी तने हैं हम;

छुप कर करो न घात रे बाली नहीं हूँ मैं;
हमला करो कि अस्त्र बिना सामने हैं हम;

खोये किसी की याद में मदहोश है किया;
छेड़ो न साज़ दिल के हुए अनमने हैं हम।




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जिंदगी है छोटी....!!!” हर पल में खुश हूं
“काम में खुश हूं....!!!” आराम में खुश हू

“आज पनीर नहीं....!!!” दाल में ही खुश हूं
“आज गाड़ी नहीं....!!!” पैदल ही खुश हूं

“दोस्तों का साथ नहीं....!!!” अकेला ही खुश हूं
“आज कोई नाराज है....!!!” उसके इस अंदाज से ही खुश हूं

“जिस को देख नहीं सकता....!!!” उसकी आवाज से ही खुश हूं
“जिसको पा नहीं सकता....!!!” उसको सोच कर ही खुश हूं

“बीता हुआ कल जा चुका है....!!!” उसकी मीठी याद में ही खुश हूं
“आने वाले कल का पता नहीं....!!!” इंतजार में ही खुश हूं

“हंसता हुआ बीत रहा है पल....!!!” आज में ही खुश हूं
“जिंदगी है छोटी....!!!” हर पल में खुश हूं




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तुम मौसम मौसम लगते हो
जो पल पल रंग बदलते हो....!!!....!!!

तुम सावन सावन लगते हो
जो सदियों बाद बरसते हो....!!!....!!!

तुम सपना सपना लगते हो
अक्सर ख्वाबों में दिखते हो....!!!....!!!

तुम पल पल मुझसे लड़ते हो
पर फिर भी अच्छे लगते हो....!!!....!!!

बात तो है शर्मीली सी
पर कहने से दिल डरता है....!!!....!!!

लो आज तुम्हें ये कहते हैं
तुम अपने अपने लगते हो....!!!....!!!





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खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की।
आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है।
अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे।
क्यों की जीसकी जीतनी जरुरत थी उसने उतना ही पहचाना मुझे।
ऐसा नहीं है कि मुझमें कोई ऐब नहीं है
पर सच कहता हूँ मुझमे कोई फरेब नहीं है!!






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खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं....!!!
जिसे भी देखिए यहाँ हैरान बहुत है।

करीब से देखा तो है रेत का घर....!!!
दूर से मगर उनकी शान बहुत है।

कहते है सच का कोई सानी नही....!!!
आज तो झूठ की आन बान बहुत है।  



मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी....!!!
यूँ तो कहने को इंसान बहुत हैं।

वक्त पे न पहचाने ये अलग बात....!!!
वैसे तो शहर में अपनी पहचान बहुत है।




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अधूरी मोहब्बत निभाना आखिर किसे नहीं आया?
बताना मुझे नहीं आया....!!! तो जताना उसे नहीं आया।



यूँ तो बिछाए हर तरफ जाल ही जाल थे मोहब्बत के
फसाना मुझे नहीं आया तो छुडाना उसे नहीं आया।

चुप्पी में भी जज्बातों की शिकायत बखूबी हुई लेकिन
सताना मुझे नहीं आया तो मनाना उसे नहीं आया।

अपनी अपनी जिंदगी के बस अपने अपने लम्हे
हँसाना मुझे नहीं आया तो रुलाना उसे नहीं आया।




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मकान चाहे कच्चे थे
लेकिन रिश्ते सारे सच्चे थे…

चारपाई पर बैठते थे
पास पास रहते थे…

सोफे और डबल बेड आ गए
दूरियां हमारी बढा गए…

छतों पर अब न सोते हैं
बात बतंगड अब न होते हैं…

आंगन में वृक्ष थे
सांझे सुख दुख थे…

दरवाजा खुला रहता था
राही भी आ बैठता था…

कौवे भी कांवते थे
मेहमान आते जाते थे…

इक साइकिल ही पास था
फिर भी मेल जोल था…

रिश्ते निभाते थे
रूठते मनाते थे…

पैसा चाहे कम था
माथे पे ना गम था…

मकान चाहे कच्चे थे
रिश्ते सारे सच्चे थे…

अब शायद कुछ पा लिया है....!!!
पर लगता है कि बहुत कुछ गंवा दिया…

जीवन की भाग-दौड़ में –
क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है?

हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी....!!!
आम हो जाती है।

एक सवेरा था....!!!
जब हँस कर उठते थे हम…

और

आज कई बार....!!!
बिना मुस्कुराये ही
शाम हो जाती है!!

कितने दूर निकल गए....!!!
रिश्तो को निभाते निभाते…

खुद को खो दिया हमने....!!!
अपनों को पाते पाते…




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गरीब दूर तक चलता है
खाना खाने के लिए।
अमीर मीलों चलता है
खाना पचाने के लिए।
किसी के पास खाने के लिए
एक वक्त की रोटी नहीं है
किसी के पास खाने के लिए
वक्त नहीं है।
कोई लाचार है
इसलिए बीमार है।
कोई बीमार है
इसलिए लाचार है।
कोई अपनों के लिए
रोटी छोड़ देता है।
कोई रोटी के लिए
अपनों को छोड़ देते है।
ये दुनिया भी कितनी निराळी है।
कभी वक्त मिले तो सोचना
कभी छोटी सी चोट लगने पर रोते थे
आज दिल टूट जाने पर भी संभल जाते है।
पहले हम दोस्तों के साथ रहते थे
आज दोस्तों की यादों में रहते है।
पहले लड़ना मनाना रोज का काम था
आज एक बार लड़ते है....!!! तो रिश्ते खो जाते है।
सच में जिन्दगी ने बहुत कुछ सीखा दिया....!!!
जाने कब हमकों इतना बड़ा बना दिया।





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स्कूल के सब यार मिल गए....!!!
यादों के अंबार मिल गए!
खुशियों भरा संसार कर दिया....!!!
“WhatsApp” ने कमाल कर दिया !!

सेंस ऑफ़ ह्यूमर तेज हो गया....!!!
भोंदू भी अंग्रेज हो गया !
कॉपी पेस्ट का जाल कर दिया....!!!
“WhatsApp” ने कमाल कर दिया !!

पांचवी फ़ेल भी लॉयर बन गया....!!!
हर कोई क्रिकेट अंपायर बन गया !
संसद सा माहौल कर दिया....!!!
“WhatsApp” ने कमाल कर दिया ! 



बीवी फोन में बिजी हो गई....!!!
पति भी इसमें कहीं खो गए....!!!
लड़ना-झगड़ना बंद कर दिया
“WhatsApp” ने कमाल कर दिया




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बचपन की कहानी याद नहीं....!!!....!!!!
बातें वो पुरानी याद नहीं....!!!....!!!!!
माँ के आँचल का इल्म तो है....!!!....!!!!
पर वो नींद रूहानी याद नहीं....!!!....!!!!!

छोटी सी बात पे लड़ते थे....!!!....!!!!
झूलों पर गिर गिर चढ़ते थे…!!
किसी चोट के अब भी निशाँ तो हैं....!!!....!!!!
पर वो चोट पुरानी याद नहीं....!!!....!!!!!

ढेरों बच्चे जब आँगन में....!!!....!!!!
था शोर-शराबा आँगन में....!!!....!!!!!
माँ ने डांटा था चिल्लाकर....!!!....!!!!
वो डांट जबानी याद नहीं....!!!....!!!!!

कितने किस्से थे दादी के....!!!....!!!!
हाथों से खाना दादी के....!!!....!!!!!
लाखों नखरे....!!!....!!!कितना गुस्सा....!!!....!!!!!
वो शर्त पुरानी याद नहीं....!!!....!!!!!

पापा से डर जब लगता था....!!!....!!!!
उन्हें दूर से देख के भगता था....!!!....!!!!!
उस दिन क्यूँ पड़ी थे मार मुझे....!!!....!!!!
उस दिन की कहानी याद नहीं....!!!....!!!!!

वो बचपन भी क्या दिन थे मेरे....!!!....!!!!
न फ़िक्र कोई....!!!....!!!न दर्द कोई....!!!....!!!!!
बस खेलो....!!! खाओ....!!! सो जाओ....!!!....!!!!
बस इसके सिवा कुछ याद नहीं....!!!....!!!!

बचपन की कहानी याद नहीं....!!!....!!!!
बातें वो पुरानी याद नहीं…!!




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जब मम्मी डाँट रहीं थी
तो
कोई चुपके से हँसा रहा था....!!!
वो थे पापा....!!! ....!!! ....!!!



जब मैं सो रहा था
तब कोई चुपके से
सिर पर हाथ फिरा रहा था ....!!!
वो थे पापा....!!! ....!!! ....!!!

जब मैं सुबह उठा तो
कोई बहुत थक कर भी
काम पर जा रहा था ....!!!
वो थे पापा....!!! ....!!! ....!!!

खुद कड़ी धूप में रह कर
कोई मुझे ए....!!!सी....!!! में
सुला रहा था....!!!
वो थे पापा....!!! ....!!! ....!!!

सपने तो मेरे थे
पर उन्हें पूरा करने का
रास्ता कोई और बताऐ
जा रहा था ....!!!
वो थे पापा....!!! ....!!! ....!!!

मैं तो सिर्फ अपनी खुशियों में
हँसता हूँ....!!!
पर मेरी हँसी देख कर
कोई अपने गम
भुलाऐ जा रहा था ....!!!
वो थे पापा....!!! ....!!! ....!!!

फल खाने की
ज्यादा जरूरत तो उन्हें थी....!!!
पर कोई मुझे सेब खिलाए
जा रहा था ....!!!
वो थे पापा....!!! ....!!! ....!!!

खुश तो मुझे होना चाहिए
कि वो मुझे मिले ....!!!
पर मेरे जन्म लेने की
खुशी कोई और मनाए
जा रहा था ....!!!
वो थे पापा....!!! ....!!! ....!!!

ये दुनिया पैसों से चलती है
पर कोई सिर्फ मेरे लिए
पैसे कमाए
जा रहा था ....!!!
वो थे पापा....!!! ....!!! ....!!!

घर में सब अपना प्यार दिखाते हैं
पर कोई बिना दिखाऐ भी
इतना प्यार किए
जा रहा था ....!!!
वो थे पापा....!!! ....!!! ....!!!

पेड़ तो अपना फल
खा नही सकते
इसलिए हमें देते हैं…
पर कोई अपना पेट
खाली रखकर भी मेरा पेट
भरे जा रहा था ....!!!
वो थे पापा....!!! ....!!! ....!!!

मैं तो नौकरी के लिए
घर से बाहर जाने पर दुखी था
पर मुझसे भी अधिक आंसू
कोई और बहाए
जा रहा था ....!!!
वो थे पापा....!!! ....!!! ....!!!

मैं अपने “बेटा” शब्द को
सार्थक बना सका या नही....!!!....!!!
पता नहीं…
पर कोई बिना स्वार्थ के
अपने “पिता” शब्द को
सार्थक बनाए
जा रहा था ....!!!
वो थे पापा!

I Love you Papa....!!!....!!!
Happy Father’s Day





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