Hindi shayari hi shayari



उसके होंठों पे कभी बददुआ नहीं होती ,

बस इक माँ है जो मुझसे कभी खफा नहीं होती.

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मौत आई तो क्या मैं मर जाऊँगा?

मैं तो इक दरिया हूँ, जो समंदर में मिल जाऊँगा.

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नाकामियों ने और भी सरकश बना दिया,

इतने हुए जलील, की खुददार हो गए...

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उसको रुखसत तो किया था, मुझे मालून न था.

सारा घर ले गया, छोड़ के जाने वाला.....

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सर पर चढ़कर बोल रहे हैं, पौधे जैसे लोग,

पेड़ बने खामोश खड़े हैं, कैसे-कैसे लोग.....

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जो चीज़ उन्होंने ख़त में लिखी थी, नहीं मिली.

ख़त हमको मिल गया है, तस्सली नहीं मिली.....

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अकेले बैठोगे, तो मसले जकड लेंगे.,

ज़रा सा वक़्त सही , दोस्तों के नाम करो.....

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ज़िन्दगी के मायने तो याद तुमको रह जायेंगे ,

अपनी कामयाबी में कुछ कमी भी रहने दो....

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मैंने उसका हाथ थमा था राह दिखने को,
अब ज़माने को दर्द हुआ तो मैं क्या करूँ ?

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किसी को मकां मिला,किसी के हिस्से में दुकां आई,

मैं घर में सबसे छोटा था,मेरे हिस्से में माँ आई.....

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मुझको थकने नहीं देता , ये ज़रुरत का पहाड़.

मेरे बच्चे मुझे बूढा होने नहीं देते......

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मैंने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ दी,
सिर्फ एक कागज़ पर लफ्जे माँ रहने दिया .....

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गम बिछड़ने का नहीं करते खानाबदोश ,

वो तो वीराने बसाने का हुनर जानते हैं.......

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प्यार अपनों का मिटा देता है ,इंसान का वजूद ,

जिंदा रहना है तो गैरों की नज़र में रहिये.......

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रंजिश ही सही , दिल को दुखाने के लिए आ,

आ फिर से मुझे , छोड़ जाने के लिए आ.....

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जी एक से बड़कर एक शायरी मारी है आप ने मेरी तरफ से ये रहा 
वो खुदगर्ज हो गए तो मै क्या करू
मुझे उनकी वफा भुलाई नही जाती

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बहुत ही जबरदस्त संग्रह.. और भी लिखिए फुल मून जी 

बेमिसाल.. खासतोर से माँ .. 
बहुत दिल को छु गयी ये लाइनें 

मैं भी कुछ पक्तियां डालना चाहूँगा,,, फुल मून जी कोई परेशानी तो नहीं?

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मिर्ज़ा ग़ालिब का एक शेर है पेश करता हूँ:

बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले..बहुत निकले मगर मेरे अरमान दिल से लेकिन कम निकले..
निकलना खुल्द( स्वर्ग) से आदम का सुनते आये थे, हुआ मालुम तब , तेरे कूचे से जब हम निकले..

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मिर्ज़ा ग़ालिब का एक शेर है पेश करता हूँ:
"दिल-इ-नादान तुझे हुआ क्या है..आखिर इस दर्द की दवा क्या है..
हमको उनसे से वफ़ा की उम्मीद ..जो नहीं जानते वफ़ा क्या है.."

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मिर्ज़ा ग़ालिब का एक शेर है पेश करता हूँ:

बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले..बहुत निकले मगर मेरे अरमान दिल से लेकिन कम निकले..
निकलना खुल्द( स्वर्ग) से आदम का सुनते आये थे, हुआ मालुम तब , तेरे कूचे से जब हम निकले..


मन जी ग़ालिब का ये शेर इस प्रकार है 
" हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले ,
बहुत निकले मेरे अरमां मगर फिर भी कम निकले !
डरे क्यूँ मेरा कातिल ? क्या रहेगा उसकी गर्दन पर ,
वो खूँ जो चश्मेतर से उम्रभर यूँ दमबदम निकले !
निकलना खुल्द से आदम का सुनते आये थे लेकिन,
बहुत बेआबरू होकर तेरे कुचे से हम निकले !!""

ग़ालिब की एक शायरी हम भी पेश करते हैं 
" हर एक बात पे कहते हो तुम की तू क्या है,
तुम्ही कहो की ये अंदाज-ए-गुफ्तगुं क्या है!
जला है जिस्म जहाँ , दिल भी जल गया होगा ,
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजूं क्या है!
रंगों में दोड़ने फिरने के, हम नहीं कायल ,
जब आँख ही से ना टपका तो लहू क्या है !
वो चीज़ जिसके लिए हो हमको हो बहिश्त ( स्वर्ग) अज़ीज़ 
सिवाए बादा-ए-गुल्फामें(सुन्दर) मुश्कबू (कस्तूरी या सुगंध ) क्या है !!"

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बहुत ही जबरदस्त संग्रह.. और भी लिखिए फुल मून जी 

बेमिसाल.. खासतोर से माँ .. 
बहुत दिल को छु गयी ये लाइनें 

मैं भी कुछ पक्तियां डालना चाहूँगा,,, फुल मून जी कोई परेशानी तो नहीं? 


don भाई,

अगर आपके पास भी इन महान शायरों के शेर हैं,तो यहाँ अवश्य पोस्ट करें,
मैंने ये सूत्र बनाया ही इसीलिए है ताकि मैं भी अपने संग्रह में कुछ और बेहतरीन शेरों को जोड़ सकूँ,
जो की मुझे आप जैसे मित्रों से ही प्राप्त होंगे.

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प्यार,,,,प्यार भी कभी पूरा होता है?

इसका तो पहला अक्षर ही अधूरा होता है.

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है जमाने की बुराई हममे,

हम जमाने को बुरा कहते हैं.

जो समझ में ना किसी के आये,

हम उसी को खुदा कहते हैं......

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ठहरी है तो इक चेहरे पे ठहरी रही है बरसों,

भटकी है तो फिर आँख भटकती ही रही है.......

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उलझा दिया दीमक ने ये कैसे शरारत की 
कागज तो नहीं चाटा ,तहरीर मिटा दी है

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मार ही डाले जो बेमौत, ये दुनिया वाले 
हम जो जिन्दा हैं तो जीने का हुनर रखते हैं /

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कही से सुना था उसने, की जीवन काँटों भरा होता है,

तब से सदा वो दूसरों के जीवन में कांटे बोता है.....

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दिल के फफोले जल उठे , सीने के दाग से,
इस घर को आग लग गयी, घर के चिराग से.....

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कौन कहता ही की छेद आसमां में हो नहीं सकता,

इक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों.......

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मेहरबान होकर बुला लो मुझे जिस वक़्त,

मैं गया वक़्त नहीं की फिर आ भी ना सकूँ.....

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रस्ते को भी दे दोष , आँखें भी कर लाल,

चप्पल में जो कील है , पहले उसे निकाल.....

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कोई इसके साथ है , कोई उसके साथ है ,

देखना ये चाहिए , मैदान किसके हाथ है.....

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काश बनाने वाले ने दिल कांच के बनाये होते,

तोड़ने वाले के हाथ में ज़ख्म तो आये होते.....:tuta-dil:

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खुद को पढता हूँ, फिर छोड़ देता हूँ,

रोज़ ज़िन्दगी का एक हर्फ़ मोड़ देता हूँ...

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मंज़ूर नहीं किसी को ख़ाक में मिलना,

आंसू भी लरज़ता हुआ आँख से गिरता है.....

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दुश्मनी का सफ़र एक कदम दो कदम,

तुम भी थक जाओगे, हम भी थक जाएंगे.....

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नन्हे बच्चों ने छू लिया चाँद को,
बूढ़े बाबा कहानी ही सुनाते रह गए..... ..

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जाती है धूप उजले परों को समेट के,

ज़ख्मों को अब गिनूंगा मैं बिस्तर पे लेट के.....

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कांच की गुडिया ताक में कब तक सजाये रखेंगे,

आज नहीं तो कल टूटेगा, जिसका नाम खिलौना है.....

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दिल की ना रह दिल में, ये कहानी कह लो,

चाहे दो हर्फ़ लिखो,चाहे जबानी कह लो,

मैंने मरने की दुआ मांगी,जो पूरी ना हुयी,

बस इसी को मेरे जीने की कहानी कह लो.......

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दुश्मनों के साथ मेरे दोस्त भी आज़ाद है,

देखना है , फेंकता है मुझ पर पहला तीर कौन......

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मैंने कहा कभी सपनो में भी शक्ल ना मुझको दिखाई,

उसने कहा, मुझ बिन भला तुझको नींद ही कैसे आई?

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मुझ में तुझ में फर्क नहीं,मुझ में तुझ में फर्क है ये ,

तू दुनिया पर हँसता है,दुनिया मुझ पर हंसती है.....

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तुमको गैरों से कब फुर्सत, 

हम अपने गम से कब खाली,

चलो बस हो चुका मिलना,

ना तुम खाली ,ना हम खाली.....

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ना समझने की ये बातें हैं, ना समझाने की,

ज़िन्दगी उचटी हुयी नींद है दीवाने की......

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दिल मुझे तितली का टूटा हुआ पर लगता है,

अब तेरा नाम भी लिखते हुए डर लगता है.....

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ज़िन्दगी से जो भी मिले , सीने से लगा लो,

गम को सिक्के की तरह उछाला नहीं करते......

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साहिल से सकूँ से किसे इनकार है लेकिन,

तूफ़ान से लड़ने में मज़ा ही कुछ और है.....

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मेरे गम ने होश उनके भी खो दिए,

वो समझाते-सम्झाते खुद ही रो दिए.....

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सताइशगर है ज़ाहिद इस क़दर जिस बाग़े-रिज्वॉ का,
वह इक गुलदस्तः है हम बेख़ुदों के ताक़े-निसियाँ का ।


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ख़ामोशी में निहाँ खूँगश्तः लाखों आरजुएँ हैं,
चिराग़े-मुर्दः हूँ मैं बेज़बाँ गोरे गरीबाँ का ।


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कुछ खटकता था मेरे सीने में लेकिन आख़िर,
जिसको दिल कहते थे सो तीर का पैकाँ निकला ।


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जॉन (ग़ालिब) छुटी शराब पर अब भी कभी-कभी,
पीता हूँ रोज-ऐ-अब्र-ओ-शब्-ऐ-माहताब में....................

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जनम मरण का साथ था जिनका, उन्हें भी हमसे बैर,

वापिस ले चल अब तो हमे, हो गयी जग की सैर....

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अपने ही साए में था, मैं शायद छुपा हुआ,

जब खुद ही हट गया, तो कही रास्ता मिला.....

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ना समझने की ये बातें हैं, ना समझाने की,

ज़िन्दगी उचटती हुयी नींद है दीवाने की....

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आज आगोश में था और कोई ,

देर तक हम तुझे न भुला सके .....

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अचानक चौंक उठा हूँ , जिस दम पड़ी है आँख ,

आये तुम आज भूली हुयी याद की तरह......

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जिंदगी में खूब कमाया , क्या हीरे क्या मोती ,

क्या करूँ मगर कफ़न में जेबें नहीं होती......

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जवानी जाती रही और हमें पता भी ना चला ,

उसी को ढूंढ रहे हैं , कमर झुकाए हुए,,,,

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वो अपने आप को बेहतर शुमार करता है ,

अजीब शख्स है , अपना ही शिकार करता है.....

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ले के उस पार ना जायेगी जुदा राह कोई ,

भीड़ के साथ ही दलदल में उतरना होगा.....

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अँधेरा कब्र का इतने में ही खुश है ,

की जलता है कोई ऊपर दिया तो...

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बस इतनी सी बात पे दुनिया गिनती है नादानों में ,

प्यार की गर्मी ढूंढ रहा हूँ , बर्फीली चट्टानों में....

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फूल मून जी..आप आये बहार ई..कृपया जरी रखिये....

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बात कम कीजिये ,जहालत छुपाते रहिये,

अजनबी दुनिया है , दोस्त बनाते रहिया ,

दिल मिले ना मिले , हाथ मिलाते रहिये...

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सफ़र में मुश्किलें आयें, तो जुर्रत और बढती है ,

कोई जब रास्ता रोके , तो हिम्मत और बढती है....

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हादसों की ज़द में हैं तो मुस्कुराना छोड़ दें ,

जलजलों के खौफ से क्या घर बनाना छोड़ दें ??/

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वो झूद भी बोल रहा था बड़े सलीके से 
मैं एइत्बार ना करता तो क्या क्या करता

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लाख तलवारे बढ़ी आती हों गर्दन की तरफ 
सर झुकना नहीं आता तो झुकाए कैसे

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मैं भी उसे खोने का हुनर सीख न पाया 
उसको भी मुझे छौड के जाना नहीं आता

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सहारा लेना ही पड़ता है मुझको दरिया का 
मैं इक कतरा हूँ तनहा तो बह नहीं सकता

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इस जहां में कब किसी का दर्द अपनाते हैं लोग ,
रुख हवा का देख कर अक्सर बदल जाते हैं लोग

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उजाले में शमा जलाने से क्या फायदा 
वक्त गुजरने के बाद पछताने से क्यां फायदा

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राज जी और साजिद जी,

आप दोनों के पास बेहतरीन शेरों का संकलन है.

कृपया ऐसे ही और शेर पेश करते रहें.

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दिल में अरमान बहुत हैं सजाऊँ कैसे,
तेरी याद बहुत आये ,भुलाऊँ कैसे

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तेरा मिलना लाख खुशी की बात सही 
पर तुझसे मिलके ,उदास रहते हैं

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खत पे खत हमने भेजे पर जवाब आता नहीं
कौन सी ऐसी खता हुयी मुझ को याद आता नहीं

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कहाँ से आ गयी दुनिया कहाँ, मगर देखो, 
कहाँ-कहाँ से अभी कारवाँ गुज़रता है।


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हम वहाँ हैं जहाँ अब अपने सिवा,
एक भी आदमी बहुत है मियाँ।




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टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, 
धज्जी-धज्जी रात मिली। 
जिसका जितना आंचल था, 
उतनी ही सौग़ात मिली।। 
जब चाहा दिल को समझें, 
हंसने की आवाज़ सुनी। 
जैसे कोई कहता हो, लो 
फिर तुमको अब मात मिली।। 
बातें कैसी ? घातें क्या ? 
चलते रहना आठ पहर। 
दिल-सा साथी जब पाया, 
बेचैनी भी साथ मिली।। 



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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाये 



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हमने इक शाम चराग़ों से सजा रक्खी है
शर्त लोगों ने हवाओं से लगा रक्खी है




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दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है
चले आओ जहाँ तक रौशनी मालूम होती है



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मुझसे मत जी को लगाओ कि नहीं रहने का
मैं मुसाफिर हूँ कोई दिन को चला जाऊँगा




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आज सोचा तो आँसू भर आये
मुद्दतें हो गईं मुस्कराये


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दोस्तों ने हर कदम पे रुसवा किया 
तब से मुझे दुश्मनों की दुश्मनी अच्छी लगी

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आईना टूट भी जाए तो कोई बात नहीं 
लेकिन दिल न टूटे ये बिकते नहीं बाजारों में

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ऐ दोस्त ,मेरी दोस्ती में क्या कमी है ,
क्यूँ दिल में गम और पलकों में नमी है

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'परिंदे भी नहीं रहते पराये आशियानों में,
हमने जिंदगी गुजारी है किराये के मकानों में।'




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एक काँच ने पत्थर से मोहब्बत करली !
टकरा कर उससे अपनी जिंदगी चकनाचूर करली !!
काँच की दीवानगी तो देखिए......!
अपने हजारो टुकरो में भी उसकी तस्वीर भरली !!



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रुला कर वो हमें खुश हो जायेंगे !
साथ में न सही दूर जाके मुस्कुरायेंगे !!
दुवा हैं खुदा से उनको दर्द न देना !
हम तो सह गए पर वो टूट जायेंगे !!





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उनकी याद में जलना अजीब लगता हैं !
धीरे - धीरे से पिघलना अजीब लगता हैं !!
सारी दुनियाँ के बदलने से मुझे फर्क नहीं परता !
बस कुछ अपनों का बदलना अजीब लगता हैं !!





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मेहनत लगती हैं सपनो को हकीकत बनाने में !
होसला लगता हैं बुलंदियों को पाने में .....!!
अरसा लगता हैं एक जिंदगी बनाने में !
जिंदगी भी कम पर जाती हैं एक सच्चा दोस्त पाने में !!






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हर खामौशी में दो बात होती हैं !
हर दिल में एक याद होती हैं !!
आपको पता हो या न हो ...!
आपकी ख़ुशी के लिए रोज हमारी फरियाद होती हैं !!





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रूठे हुए को मनाना जिंदगी हैं ! 
दुसरो को हँसाना जिंदगी हैं !!
कोई जीत कर खुश हुवा तो क्या हुवा !
सब कुछ हार कर मुश्कुराना जिंदगी हैं !!





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मुमकिन नहीं इस प्यार को भुला पाना ! 
मुमकिन नहीं आपको यादों से मिटा पाना !!
आप एक कीमती तोहफा हो दोस्ती का !
मुमकिन नहीं इस तोहफे की किम्मत चूका पाना !!

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तेरा मिलना लाख खुशी की बात सही 
पर तुझसे मिलके ,उदास रहते हैं 


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