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  • तुम्हे तो इल्म है, क्या खूब वो ज़माना था!
  • हमारे पास तुम्हारा भी आना-जाना था!

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  • तुम्हे तो इल्म है, क्या खूब वो ज़माना था!
  • हमारे पास तुम्हारा भी आना-जाना था! 

  • तुझे खबर भी है इसकी ओ रूठने वाले,
  • तुम्हारा प्यार ही मेरा कीमती खजाना था!

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  • तुम्हे तो इल्म है, क्या खूब वो ज़माना था!
  • हमारे पास तुम्हारा भी आना-जाना था! 

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  • तुझे खबर भी है इसकी ओ रूठने वाले,
  • तुम्हारा प्यार ही मेरा कीमती खजाना था! 

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  • तुम्हारी रात का नुकसान इसमें क्या होता,
  • तुम्हे तो आके मेरा होसला बढ़ाना था!

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  • तुम्हे तो इल्म है, क्या खूब वो ज़माना था!
  • हमारे पास तुम्हारा भी आना-जाना था! 

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  • तुझे खबर भी है इसकी ओ रूठने वाले,
  • तुम्हारा प्यार ही मेरा कीमती खजाना था! 

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  • तुम्हारी रात का नुकसान इसमें क्या होता,
  • तुम्हे तो आके मेरा होसला बढ़ाना था! 
  • तमाम बातें ये उजड़ा चमन बता देगा,
  • इसी चमन में कभी अपना आशियाना था!

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  • नकाब रुख से हटाओ,के रात जाती है!
  • कोई तो बात सुनाओ, के रात जाती है!

  • जो मैकदे में नहीं माय तो क्या हुआ, 
  • हमें नज़र से पिलाओ, के रात जाती है!

  • वो एक शब् के लिए मेरे घर पे आये हैं, 
  • सितारे तोड़ के लाओ, के रात जाती है!

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  • धोखा न देना, तुझ पे ऐतबार बहुत है!
  • ये दिल तेरी चाहत का तलबगार बहुत है!
  • तेरी सूरत न देखें , तो दिखाई कुछ नहीं देता,,
  • हम क्या करें के तुझ से हमें प्यार बहुत है!

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  • आरज़ू ये है कि उनकी हर नज़र देखा करें!
  • वो ही अपने सामने हों, हम जिधर देखा करें!
  • इक तरफ हो सारी दुनिया, इक तरफ सूरत तेरी;
  • हम तुझे दुनिया से होकर बेखबर देखा करें !

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  • रात घिरे तक घायल नगमें, करते हैं एलान यहाँ!
  • ये दुनिया है संग-दिलों कि, कोई नहीं इंसान यहाँ!
  • प्यार भीख में भी मांगो तो कोई प्यार न डाले झोली में;
  • बिन मांगे मिल जाते हैं, रुसवाई के सामान यहाँ!


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  • एक-एक सांस उसके लिए कत्लगाह थी!
  • उसका गुनाह ये था कि वो बेगुनाह थी!

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  • एक-एक सांस उसके लिए कत्लगाह थी!
  • उसका गुनाह ये था कि वो बेगुनाह थी!


  • वो एक मिटी हुई सी इबारत बनी रही ,
  • चेहरा खुली किताब था, किस्मत सियाह थी!

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  • एक-एक सांस उसके लिए कत्लगाह थी!
  • उसका गुनाह ये था कि वो बेगुनाह थी!


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  • वो एक मिटी हुई सी इबारत बनी रही ,
  • चेहरा खुली किताब था, किस्मत सियाह थी! 

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  • शेहनाइयां उसे भी बुलाती रही मगर,
  • शेहनाइयां-उसे भी बुलाती रही मगर,

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  • एक-एक सांस उसके लिए कत्लगाह थी!
  • उसका गुनाह ये था कि वो बेगुनाह थी!


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  • वो एक मिटी हुई सी इबारत बनी रही ,
  • चेहरा खुली किताब था, किस्मत सियाह थी! 


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  • शेहनाइयां उसे भी बुलाती रही मगर,
  • शेहनाइयां-उसे भी बुलाती रही मगर,

  • हर मोड़ पर दहेज़ की कुर्बान्गाह थी! 

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  • और वो चाहती थी कि रूह उसे सौंप दे मगर,
  • वो चाहती थी कि रूह उसे सौंप दे मगर,

  • उस आदमी की सिर्फ बदन पर निगाह थी!

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  • अपनी सूरत से जो जाहिर है छुपाये कैसे 
  • तेरी मर्जी के मुताबिक नज़र आये कैसे

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  • जहा रहेगा वही रोशनी लुटायेगा 
  • किसी चिराग का अपना माकन नहीं होता

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  • अपनी सूरत से जो जाहिर है छुपाये कैसे 
  • तेरी मर्जी के मुताबिक नज़र आये कैसे


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  • ताल्लुकात कभी एक से नहीं रखते 
  • उसे गँवा के भी जीने का हौशला रखना 

  • जब अपने ही लोग आयेंगे लूटने के लिए 
  • तो दोस्ती का तकाजा है घर खुलना रखना

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  • वो मेरे घर नहीं आता मैं उसके घर नहीं जाता 
  • मगर इन एहतियातो से ताल्लुक मर नहीं जाता

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  • मुहब्बत के ये आंशु है इन्हें आँखों में रहने दो 
  • शरीफों के घरों का मशला बाहर नहीं जाता

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  • मुहब्बत के दिनों की यही खराबी है 
  • यह रूठ जाये तो फिर लौट कर नहीं आते 

  • खुसी की आंख में आंशु की भी जगह रखना 
  • बुरे ज़माने किसी से पूछ कर नहीं आते

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  • वो प्यार जिसके लिए हमने क्या गवां न दिया 
  • उसी ने बच के निकलने का रास्ता न दिया 

  • जब एक बार जला ली हाथेलीया अपनी 
  • तो फिर खुदा ने उस हाथ में दिया न दिया 

  • जबान से दिल के सभी फैसले नहीं होते 
  • उसे भुलाने को कहते तो थे पर भुला न दिया

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  • मार ही डाले जो बेमौत ये दुनिया वाले 
  • हम जो जिंदा हैं तो जीने का हुनर रखते हैं 


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  • मार ही डाले जो बेमौत ये दुनिया वाले 
  • हम जो जिंदा हैं तो जीने का हुनर रखते हैं 






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  • अब भी कुछ नहीं बिगड़ा प्यारे पता करो लोहारों का
  • धार गिराना काम नहीं है लोहे पर सोनारों का



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  • अब तो मजहब कोई ऐसा चलाया जाए
  • जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए



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  • इस जहाँ में प्यार महके जिंदगी बाकी रहे
  • ये दुआ मांगो दिलों में रोशनी बाकी रहे


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  • अबके सावन में शरारत ये मेरे साथ हुई
  • मेरा घर छोड़कर कुल शहर में बरसात हुई


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  • अपने खेतों से बिछड़ने की सज़ा पाता हूं
  • अब मैं राशन की क़तारों में नज़र आता हूं


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  • आदमी आदमी को क्या देगा, जो भी देगा वही खुदा देगा
  • जिंदगी को क़रीब से देखो, इसका चेहरा तुम्हें रुला देगा



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  • सब कुछ झूठ है लेकिन फिर भी बिलकुल सच्चा लगता है
  • जानबूझकर धोखा खाना कितना अच्छा लगता है

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  • मेरी निगाहों ने छेड़ा था ,
  • एक दिन नगमा प्यार का !
  • उसके बदन से,
  • अभी तक सदाए आती है !
  • कभी हक में रहे थे,
  • मेरे गुलुश्फा-इशरत !
  • अब उन लबो पर,
  • फरकत बददुआए आती है !
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  • ग़ालिब का एक शेर है
  • तेरे वादे पर जिए हम ,तो ये जान छूट जाना
  • की खुशी से मर जाते , अगर ऐतबार होता

  • अर्थ है
  • ऐ दोस्त ,तू मुझे ज़िंदा देखकर यह न समझ की मैंने तेरे वादे पर ऐतबार किया था ..
  • अगर कहीं मैंने तेरा ऐतबार किया होता तो ख़ुशी के मारे मर गया होता ...
  • ज़िंदा रहना ही इस बात का सबूत है की मुझे तेरे वादे पर विश्वाश नहीं है

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  • दिल का कोई सौदा नहीं होता
  • जिस पर आता उसी का होता
  • चलते है जो जीवन मे साथ
  • निभाते हैं हर समय
  • चाहे न चलते हों राह पर हाथ में डालकर हाथ अपने मन की आंखें बंद कर लो
  • नींद स्वयं ही आ जाती है
  • जो संभाला कोई ख्याल तो
  • फिर गायब हो जाती है
  • सोने से मिला सुख नहीं मिलता
  • जिसके लिये बनी है रात
  • गीत-संगीत के तोहफों से
  • बिखरी पड़ी है दुनियां
  • अपने कानों से मीठी आवाज सुनने के लिये
  • क्या किसी से शब्द और आवाज मांगना
  • इस जीवन में किससे आशा
  • और किससे निराशा
  • जिनसे उम्मीद करोगे
  • बनायेंगे तमाशा
  • जीवन को जिंदा दिलों की तरह जियो
  • जब तक न छोड़े अपना साथ

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  • १) सुर्ख लबों पेम जो तेरा नाम आया हैं,

  • नर्म आँखों से जो यादें बहीं हैं,

  • दिल झूमकर बस गा रहा हैं,

  • मेरे मन में बस एक तूहीं हैं...

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  • २) बस चाँद को देखना हमें गवारा नहीं,

  • इन आँखों को तो तेरा इंतजार हैं,

  • चांदनी रात अब हमें लूभाती नहीं,

  • तेरा साथ अगर दुश्वार हैं...

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  • ३) किसी का नाम लबों पर आना इकरार नहीं होता,

  • प्यार का इजहार ही बस मंजूर नहीं होता,

  • किसी के याद से जबतक दिल बेकरार नहीं होता,

  • जान मेरी तबतक यह प्यार नहीं होता...


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  • ४) दिल की मजबूरियाँ उन्हें बता न सकें,

  • वो ख़ुद भी तो यें समझ न सकें,

  • और फासला बढ़ता ही गया,

  • हम ख़ुद होकर उसे मिटा न सकें...


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  • ५) दिल की तनहाईयों में आपका साथ पाया, और हम आपकें दीवानें हो गयें,

  • सोचतें हैं अब इस दुनिया में, कितनीं शमाएं, कितनें परवानें हो गयें,

  • शमा और परवानेंका साथ तो, जनम-जनम का बंधन हैं,

  • हम और आप क्या अलग हैं, जीवन आपको अर्पण हैं...

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  • जनाजा रोककर वो मेरे से इस अन्दाज़ मे बोले,
  • गली छोड्ने को कही थी हमने तुमने दुनियां छोड दी।

  • जो गिर गया उसे और क्यों गिराते हो,
  • जलाकर आशियाना उसी की राख उड़ाते हो ।

  • गुज़रे है आज इश्*क के उस मुकाम से,
  • नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से ।

  • जब जुबां खामोशी होती है नज़र से काम होता है,
  • ऐसे माहौल का ही शायद मोहब्बत नाम होता है।

  • वो फूल जिस पर ज्यादा निखार होते हैं,
  • किसी के दस्त हवस का शिकार होते हैं ।

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  • मै जिसके हाथ मे एक फूल दे कर आया था,
  • उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश मे है ।


  • यूं तो मंसूर बने फिरते हैं कुछ लोग,
  • होश उड जाते हैं जब सिर का सवाल आता है ।

  • मुझे तो होश नही, तुमको खबर हो शायद ,
  • लोग कहते है कि तुम ने मुझ को बर्बाद कर दिया ।


  • देखिए गौर से रुक कर किसी चौराहे पर,
  • जिंदगी लोग लिए फिरते हैं लाशों के तरह ।

  • इस नगर मे लोग फिरते है मुखौटे पहन कर,
  • असल चेहरों को यहां पह्चानना मुमकिन नही ।

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  • गीत-संगीत के तोहफों से
  • बिखरी पड़ी है दुनियां
  • अपने कानों से मीठी आवाज सुनने के लिये
  • क्या किसी से शब्द और आवाज मांगना

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  • इस जीवन में किससे आशा
  • और किससे निराशा
  • जिनसे उम्मीद करोगे
  • बनायेंगे तमाशा

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