Mohabbat Sher O Shayari


  • अगर अपने को फितरत का यह इंसां राजदाँ कर ले,
  • हर इक जर्रे से पैदा बेतकल्लुफ सौ जहां कर।

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  • अगर दर्दे-मुहब्बत से न इन्साँ आशना होता,
  • न मरने का अलम होता, न जीने का मजा होता।

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  • अजब आरजू है, अनोखी अदा है,
  • तुझी से तुझे माँगना चाहता हूँ।

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  • अजल को दोष दें, तकदीर को रोयें, मुझे कोसें 
  • मेरे कातिल का चर्चा क्यों है मेरे सोगवारों में।

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  • अजाबे-जां है खुदा जाने क्यों यह आजादी,
  • सुकून था जो कफस में वह आशियां में नहीं।

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  • अदा निगाहों से होता है फर्जे-गोयाई,
  • जुबां की हद से जब शौके-बयां गुजरता है।

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  • अनगिनत लोगों ने दुनिया में मुहब्बत की है,
  • कौन कहता है कि सादिक न थे जज्बे उनके,
  • लेकिन उनके लिए तश्हीर का सामान नहीं,
  • क्योंकि ये लोग भी अपनी तरह मुफलिस थे।

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  • 'अनीस' आसाँ नहीं आबाद करना घर मुहब्बत का,
  • यह उनका काम है जो जिन्दगी बरबाद करते हैं।

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  • अपना तो आशिकी का किस्सा-ए-मुख्तसर है,
  • हम जा मिले खुदा से दिलबर बदल-बदल कर।

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  • अपनी कमजर्फी का गम है और काई गम नहीं,
  • दिल से तेरा गम न संभला, मुझको है बस ये मलाल।

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  • अपनी गली में मुझको न कर दफ्न बादे-कत्ल,
  • मेरे पते से खल्क को क्यों तेरा घर मिले।

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  • अपनी नजर से तूने हमें क्या गिरा दिया,
  • सारे जहाँ के दिल से, नजर से गिरा दिया।

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  • अपनी बर्बादियों का रंज नहीं लेकिन,
  • तेरी तन्हाइयों का क्या होगा।

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  • अपनी मख्मूर निगाहों को न दो इज्ने-खिराम,
  • बढ़ गई और अगर प्यास तो फिर क्या होगा।

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  • अपनी रूसवाई का गम था जब हमें, वो दिन गये,
  • अब तो यह गम है कि ऐसी फिर न रूसवाई हुई।

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  • अपने मरने का गम नहीं लेकिन,
  • हाय तुमसे जुदाई होती है।

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  • अपने हाथों की लकीरों में बसा लो मुझको,
  • मैं हूँ तेरा तो नसीब अपना बना लो मुझको।
  • मुझसे तू पूछने आया है वफा के मायने,
  • यह तेरी सादादिली मार न डाले मुझको।
  • खुद को मैं कहीं बाँट न लूँ दामन – दामन,
  • कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको।

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  • अपने-अपने हौसले,अपने तलब की बात है,
  • चुन लिया हमने तुम्हें सारा जहाँ रहने दिया।

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  • अब करके फरामोश तो नाशाद करोगे,
  • पर हम जो न होंगे तो बहुत याद करोंगे।

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  • अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें ,
  • जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ।

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  • अब क्या करूँ तलाश किसी कारवां को मैं,
  • गुम हो गया हूँ पाके तेरे आस्ताँ को मैं।

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  • अब जाके आरजू का मुकम्मल हुआ है नक्श,
  • सब मानने लगे हैं कि मैं दीवाना हो गया।

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  • अब तक न खबर थी, मुझे उजड़े हुए घर की,
  • तुम आए तो घर बेसरोसामां नजर आया।


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  • अब बुझा दो ये सिसकते हुए यादों के चराग,
  • इनसे कब हिज्र की रातों में उजाला होगा।

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  • अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें,
  • कुछ दर्द तो कलेजे से लगाने के लिए हैं।
  • यह इल्म का सौदा, ये रिसाले, ये किताबें,
  • इक शख्स की यादों को भुलाने के लिए है।

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  • अभी तो दिल में हल्की-सी कसक मालूम होती है,
  • बहुत मुमकिन है कल इसका मुहब्बत नाम हो जाये।

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  • 'अर्श' पहले यह शिकायत थी खफा होता है वह,
  • अब यह शिकवा है कि वह जालिम खफा होता नहीं।

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  • अलग बैठे थे फिर भी आँख साकी की पड़ी मुझ पर,
  • अगर है तिश्नगी कामिल तो पैमाने भी आयेंगे।

  • अश्क बनकर आई हैं वह इल्तिजाएं चश्म तक,
  • जिनको कहने के लिए होठों पै गोयाई नहीं।

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  • आंखों ने जरे-जर्रे पर सिज्दे लुटाये हैं,
  • क्या जाने, जा छुपा मेरा पर्दानशीं कहाँ।

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  • आ मैं तुझे बता दूँ, राजे-गमे-मुहब्बत,
  • एहसासे-आरजू ही, तकमीले-आरजू है।

  • आ कि तुझ बिन इस तरह ऐ दोस्त घबराता हूँ मैं,
  • जैसे हर शै में किसी शै की कमी पाता हूँ मैं।

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  • आ कि तुझ बिन कम हुआ जाता है लुत्फे-जिन्दगी,
  • टिमटिमाता है चरागे - जिन्दगी तेरे बगैर।

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  • आइना हो जाये मेरा इश्क उसके हुस्न का,
  • क्या मजा हो दर्द गर खुद ही दवा देने लगे।

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  • आग थे इब्तिदा- ए - इश्क में हम,
  • अब जो हैं खाक, इन्तिहा है यह।

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  • आगे खुदा ही जाने अंजामे - इश्क क्या हो,
  • जब ऐ 'शकील' अपना यह हाल है अभी से।

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  • आज कैसी हवा चली ऐ 'फिराक',
  • आख बेइख्तियार भर आई।

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  • आज वो मेहरबाँ से लगते हैं,
  • कोई वादा वफा न हो जाये।
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  • आते-आते आयेगा उनको खयाल,
  • जाते - जाते बेखयाली जायेगी।

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