Urdu Mohabbat Shayari



इश्क से लोग मना करते हैं,
जैसे कुछ इख्तियार है अपना............$$$$$

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इश्क है इक निशाते-बेपायाँ,
शर्त यह है कि आरजू न हो............$$$$$

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इश्के-लामहदूद जब तक रहनुमा होता नहीं,
जिन्दगी से जिन्दगी का हक अदा होता नहीं............$$$$$

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इस  दर्द-ए-मुहब्बत के अन्दाज निराले हैं,
घटता तो मरज होता,बढ़ता तो दवा होता............$$$$$

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इस इज्तिराब पर कुर्बान इक जहाने-सकूँ,
कोई संभाल रहा है और तड़प रहा हूँ मैं............$$$$$

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इस इन्तिहाए-तर्के-मुहब्बत के बावजूद,
हमने लिया है, नाम तुम्हारा कभी-कभी............$$$$$

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इस तरह से तुमने क्यों देखा मुझे,
हर तमन्ना ख्वाब बनकर रह गई............$$$$$

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इस लिये चुप हूँ कि बात और न बढ़ जाये कही,
वर्ना सच ये है कि कुछ तुमसे गिला है तो सही............$$$$$

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इसमें जब तक किसी की आस न थी,
दिल था इक फूल जिसमें बास न थी............$$$$$

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इससे बढ़कर नहीं कोई दौलत,
लीजिये जाँ निसार करता हूँ............$$$$$


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इसी का नाम है मजबूरी-ए-दिल, उनके कूचे में,
न जाने की कसम सौ बार खा लेना, मगर जाना............$$$$$

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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए............$$$$$

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उठ कर तो आ गये हैं तेरी बज्म से मगर,
कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आये हैं............$$$$$

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उधर वह बदगुमानी है, इधर यह नातवानी है
न पूछा जाये है उससे, न बोला जाये है हमसे............$$$$$

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उन जफाओं पर भी दिल क्या जाने क्यों गिरवीदा है,
इश्क है इक राज जो आशिक से भी पोशीदा है............$$$$$


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उनकी फितरत है कि मुझको भूल जाते हैं वह,
मेरी आदत है कि उनको याद कर लेता हूँ मैं............$$$$$

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उनके आने की बंधी थी आस जब तक हमनशीं,
सुबह हो जाती थी अक्सर जानिबे - दर देखते............$$$$$

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उनको आता है प्यार पर गुस्सा,
हमको गुस्से पर प्यार आता है............$$$$$

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उनको देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक,
वह समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है............$$$$$
हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन,
दिल को खुश रखने को 'गालिब' ये ख्याल अच्छा है............$$$$$


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उनकी फितरत है कि मुझको भूल जाते हैं वह,
मेरी आदत है कि उनको याद कर लेता हूँ मैं............$$$$$

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उनके आने की बंधी थी आस जब तक हमनशीं,
सुबह हो जाती थी अक्सर जानिबे - दर देखते............$$$$$

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उनको आता है प्यार पर गुस्सा,
हमको गुस्से पर प्यार आता है............$$$$$

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उनको देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक,
वह समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है............$$$$$
हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन,
दिल को खुश रखने को 'गालिब' ये ख्याल अच्छा है............$$$$$

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उस एक शब के सहारे कट रही है हयात,
वो एक शब जो तेरी महफिल में गुजार आये............$$$$$

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उसके लिये तो हाथ उठाना भी है गुनाह,
जिसकी दुआ हों आप, वो फिर क्या दुआ करे............$$$$$

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उसके बगैर भी तो 'अदम' कट गई हयात,
उसका खयाल उससे जियादा जमील था............$$$$$

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एक तुम हो कि हमको नंगे-महफिल कहते जाते हो,
और एक हम हैं कि तुमको जीनते-महफिल समझते हैं............$$$$$

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ऐ दुश्मने - तमन्ना इसका जवाब दे दे,
वो हाँ बने तो क्या हो, मरता हूँ जिस नहीं पर............$$$$$

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ऐ दिले -नाआकबतअंदेश जब्ते - शौक कर,
कौन ला सकता है ताबे-जल्वा-ए-दीदारे-दोस्त............$$$$$

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ऐ हासिले-खुलूस बता क्या जवाब दूँ,
दुनिया यह पूछती है कि मैं क्यों उदास हूँ............$$$$$

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ऐ दोस्त हमने तर्क-ए-मुहब्बत के बावजूद,
महसूस की है तेरी जरूरत कभी - कभी............$$$$$

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ऐ सितमगर मेरे इस हौसले की दाद दे ,
सामने तेरे अगर फरियाद कर लेता हूँ मैं............$$$$$

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ऐसा न हो यह दर्द बने दर्द-ए-लादवा,
ऐसा न हो कि तुम भी मुदावा न कर सको............$$$$$

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और क्या चीज कुर्बां करूँ आप पर,
दिल जिगर आप का, जिन्दगी आप की............$$$$$

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और तो कुछ कमी नही आपके इक्तिदार में,
आप मुझको भुला सकें, यह नहीं इख्तियार में............$$$$$

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इश्क पर जोर नहीं, है ये वो आतिश 'गालिब',
कि लगाये न लगे और बुझाये न बने............$$$$$

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इश्क में क्या सवाले-खुद्दारी,
जाने कै बार अपनी बात गई............$$$$$

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इश्क  में ख्वाब का ख्याल किसे,
न लगी आंख जब से आंख लगी............$$$$$

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इश्क में तबिअत ने जीस्त का मजा पाया,
दर्द की दवा पाई और दर्द बेदवा पाया............$$$$$

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इश्क सुनते थे जिसे हम, वह यही है शायद,
खुद-ब-खुद दिल में है इक शख्स समाया जाता............$$$$$

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